सोमवार, 14 मार्च 2011

एस. के. पाण्डेय की लघुकथा - लिफ्ट

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बहुत ही कड़ी धूप थी। ड्राइवर ने देखा कि कोई वृद्धा लिफ्ट माँग रही है। वह गाड़ी धीमी करने लगा । ज्यों ही गाड़ी धीमी हुई राज बोल पड़ा “ड्राइवर यह सवारी गाड़ी नहीं है। अपना रास्ता देखो”। ड्राइवर ने गाड़ी बढ़ा दी।

गाड़ी अभी रफ्तार पकड़ी ही थी कि एक युवती धूप में खड़ी प्रतीक्षारत दिखी। ड्राइवर उसी वेग से गाड़ी लिए जा रहा था। अचानक उसे राज कि ऊँची आवाज सुनाई दी। “बहरा है क्या ? गाड़ी रोक ! पीछे ले” !

राज ने युवती से पूछा “ कहाँ चलना है” ? और आग्रहपूर्वक बोला “चलो हम आपको छोड़ देगें। धूप तेज है। सवारी गाड़ी का कोई भरोसा नहीं कि कब तक आये”।

युवती मुस्कराई। और बोली “नो, थैंक्स। दरअसल मुझे कहीं नहीं जाना है। बेटे की स्कूल बस आ रही होगी। उसे ही लेने आई हूँ”।

राज ड्राइवर पर झल्लाया। चलेगा भी कि यहीं खड़ा रहेगा। ड्राइवर मुस्कराया और गाड़ी आगे बढ़ा दिया ।

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डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ. प्र.)।

URL: https://sites.google.com/site/skpandeysriramkthavali/

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5 blogger-facebook:

  1. दोहरी सोच का अच्‍छा नमूना।

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  2. विकृत मानसिकता को दर्शाती बेहतरीन लघुकथा।

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  3. लाजवाब, क्या चित्रण है ..................................
    रोजमर्रा की आदतों में सुमार,
    लेकिन ध्यान देने योग्य

    उत्तर देंहटाएं

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