शुक्रवार, 18 मार्च 2011

पुरुषोत्तम विश्वकर्मा की होली विशेष हास्य व्यंग्य ग़ज़लें

happy holi

ग़ज़ल 1

मुजस्‍सम ले के जाती हैं हमें मुल्‍के अदम बीड़ी।

नहीं रहना भरम आप यूं हैं चीज कम बीड़ी॥

 

सुनाते हैं सजा सबसे बड़ी ये पंच दोषी को ,

अलग कर जात से और बंद कर हुक्‍का चिलम बीड़ी।

 

रखे सिगरेट आयातित वही अफसर भी उकता कर ,

बिचारे अर्दली से मांग पीते बेशरम बीड़ी।

 

प्रतीक्षा की धड़ी शौचालय में खत्‍म तब होती ,

सुड़क लेते नहीं हैं पांच दस जब तक बलम बीड़ी।

 

हमारी अक्‍ल जब भी धास चरने को चली जाये ,

उसे खूंटे से ला कर बांघ देती दम. ब. दम बीड़ी।

 

नहीं हो जेब में बण्‍डल त़लब़ पीने की हो जाये ,

किसी भी अज़नबी से मांग लेना बेहिचक बीड़ी।

 

हुई पाबंदियां आयद न दफ्तर में पीओ बीड़ी ,

बगावत का बनेगी एक दिन मुद्‌दा अहम बीड़ी

 

यही हैं आपसी सौहार्द का प्रतीक ‘दामोदर ‘,

पीयें लो एक ही बीड़ी को मिल के आप हम बीड़ी।

--

 

ग़ज़ल 2

कभी भी गिनवा कर के देखले सरकार भिखमंगे।

मिलेंगे कोठियों बंगलों में भरमार भिखमंगे॥

 

इनकी हैसियत है क्‍या भला खुद ही समझ लेना,

पढे जो दो रुपये का मांग कर अखबार भिखमंगे॥

 

कला ये मांगने की क्‍या पता सीखी कहां से हैं,

न खाली हाथ लौटे हैं कभी ये यार भिखमंगे॥

 

इनके ठाट देखें तो लगे तकड़े रईशजादे,

लगे ये मांगते है तो तजुर्बेकार भिखमंगे॥

 

नहीं अंधे अपाहिज, बेमुकद्दर वक्‍त के मारे,

बिना झोली, कटौरे, शर्म बेपिन्‍दार भिखमंगे॥

 

अगरचे मांगने निकले सवेरे शाम को लौटे,

नहीं तौहीन समझे दर दर खा दुत्‍कार भिखमंगे॥

 

अभी कुछ और भी कहने का मन करता है लेकिन,

सुना है आजकल के हैं बड़े खूखार भिखमंगे॥

 

लगे अज्‍जाद इनके अपने पुश्‍तेनी भिखारी थे,

मिले होंगे यकीनन इनके रिश्‍तेदार भिखमंगे॥

 

इन पे फब्‍तियां क्‍योंकर असर कुछ भी नहीं करती,

बने हैं कौन-सी मिट्टी के आखिरकार भिखमंगे॥

 

पुरुषोत्‍तम विश्‍वकर्मा

5 blogger-facebook:

  1. होली की मस्ती को सही तरीके से दिखाया है

    गजल १ में यदि बीडी की जगह भांग होती तो ज्यादा मजा आता

    पाठकों पर अत्याचार ना करें ब्लोगर

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (19.03.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

    उत्तर देंहटाएं
  3. प्रतीक्षा की धड़ी शौचालय में खत्‍म तब होती ,

    सुड़क लेते नहीं हैं पांच दस जब तक बलम बीड़ी।
    वाह वाह ,,,, गज़ब का बीड़ी महात्म्य :) होली की मंगल कामनाएँ

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाकई बीडी की ऐसी महिमा कभी न सुनी थी ,.......
    आपको होली की शुभकामनाये
    ...

    उत्तर देंहटाएं

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