बुधवार, 23 मार्च 2011

मालिनी गौतम की रचनाएँ

क्रिसमस ट्री

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जन्मदिन पर मिले

बहुत से तोहफों में

एक तोहफा था-‘छोटा सा क्रिसमस ट्री’

बड़े चाव से एक छोटे से गमले में

मैनें उस पौधे को लगाया।

उसे रोज़ पानी देना,

मिट्टी गोड़ना,

उससे बातें करना,

उसकी फैली हुई छोटी-छोटी बाहों को सहलाना

मेरा नित्यक्रम था ।

 

मेरे प्यार-दुलार

खाद,मिट्टी और पानी नें

अपना रंग दिखाया

देखते ही देखते पौधा बढ़्ने लगा

और उसकी जड़ों ने गमले में तिराड़ डाल दी ।

मैनें उसे एक बड़े गमले में

उतार दिया.......

धीरे-धीरे क्रिसमस ट्री शान बन गया

कभी मेरे बगीचे की,

कभी बरामदे की,

तो कभी ड़्रॉईंग रूम की

हर आने-जाने वाले की

नज़र उस पर टिक जाती,

अरे वाह.....!

 

दो फुट के गमले में सात फुट का पौधा !

मैं मन ही मन खुश होती

वैसे ही, जैसे एक माँ

अपने बच्चे की तारीफ सुनकर

खुश होती है।

पर जल्द ही यह गमला भी

छोटा पड़ने लगा।

पर्याप्त पोषण के अभाव में

मेरा पेड़ मुरझानें लगा।

मैं समझ रही थी इस बात को

कि खुली जमीन और खुले आकाश के वृक्ष को

मैनें कैद कर रखा है

एक गमले और घर में!

 

उसे दूर करने के ख्याल से

मैं काँप उठती.......

मेरे बगीचे की शान.........

मेरी बरसों की मेहनत, जतन....

पर आखिरकार स्वार्थ को तो

हारना ही था ममता के सामने

और मैनें मेरे कॉलेज़ के बगीचे में

उस पेड़ को लगाकर

उसे लौटा दी उसकी- खुली जमीन,खुला आसमान!

अब हर सुबह

जैसे ही कॉलेज में कदम रखती हूँ

आसमान से बातें करता,

मुस्कराता,

अपनी बाहों को हवा में झुलाता ‘क्रिसमस ट्री’

मेरा आलिंगन करने को तत्पर दिखाई देता है.....

मैं मन ही मन न्यौछावर हो जाती हूँ

मेरी ममता के इस नये रूप पर.....

 

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एक होलियाना गजल

--

आज होली के संग वो बहकने लगे

लाज में डूब कर हम सिमटने लगे

 

लाल रंगों की ऐसी फुहारें पड़ी

भीगी कोरी चुनर हम दहकने लगे

 

हँस उठे फूल टेसू के आगोश में

मन हुआ बावरा हम चहकने लगे

 

गीत फागुन के कोकिल सुनाने लगी

महुआ खिल-खिल उठा हम महकने लगे

 

आँखों ही आँखों में कुछ इशारे हुऐ

साथ उनका मिला हम सँवरने लगे

--

डॉ.मालिनी गौतम

5 blogger-facebook:

  1. गीत फागुन के कोकिल सुनाने लगी
    महुआ खिल-खिल उठा हम महकने लगे

    होलियाना गजल......बहुत ही खूबसूरत अलफ़ाज़.

    उत्तर देंहटाएं
  2. अई अई ओ ! मालिनी जी ! आप बोत अच्चा लिका .....आपका दोनों पोयम अती सुन्दरम. पइले हम तोड़ा सा पड़ा फिर गा के बी देका अमको वेरी गुड्ड लगा. ओली वाला पोयम एकदम मस्त लिका जी ! एंड जो ट्री वाला पोयम ना वो तो बोत अच्चा जी ! अमको आइसा लगा जैसा ट्री अम से बात किया ...रियली अम ह्यूमनबींग लोग अपना अच्चा लगने वास्ते ट्री लोग को लाइफ अरेस्ट करता ...कितना सैड बात जी ! अम जब बी बोनसाई देकता अम को बोत दुक होता . आप एक अच्चा मैसेज दिया ....अम आपको थैंक यूं तो बोलना मांगता ना !

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  5. krismas tree bahut achchi hai. i like much.

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