गुरुवार, 3 मार्च 2011

मनसा पाण्‍डेय की कविता - आज राम की आँखें हैं उदास...

ram aur sita

आज राम की आँखें हैं उदास

अजान बाहु राम ने

कानूनी दराज से

पन्‍ने निकाले

महिला विधेयक

उसके काले अक्षरों

में जंगल की तमाम

वृक्ष झाड़ियां

कंटकाकीर्ण राहों में

खून से सने

लहूलुहान कोमल पग

संशय की आग में

झुलसती

बार-बार सीता,

रोती, कलपती

बार-बार सीता

यादें बार-बार आती हैं पास

आज राम की आंखें हैं उदास

 

राम

एक बार मैं फिर

अयोध्‍या आना चाहती हूँ

तुम्‍हारे कांधे पर सिर

रखकर रोना चाहती हूँ

राम के राजीव लोचन से

दो बूँद सरक आये

पर शब्‍द!

गुलाबी होंठ पर पड़ी

पपड़ियों के कांटों

से बाहर नहीं निकल पाये

सीता का मन कसैला हो गया

सरयू का पानी फिर मैला हो गया

 

राम के हाथ से

काले अक्षरों के सफेद

पन्‍ने

हवा में लहरा उठे

सीता ने देखा,

पढ़ा फिर बोलीं

नहीं राम!

मुझे विधेयक नहीं

विश्‍वास चाहिए

मुझे कानून नहीं

अनुराग चाहिए

 

राम!

शर्तों पर रचते

विवाह

स्‍वयंवर कहलाते

पुरूषोत्‍तम का लबादा

ओढ़े

स्‍त्री को वन पहुँचाते

शीलनिधि का दर्प

बार-बार झुलसाती

मुझे

मर्यादाओं और नैतिकता

पर

हलाल होती मैं

एक बार फिर अयोध्‍या

आना चाहती हूँ

तुम्‍हारे कांधे पर सिर

रखकर रोना चाहती हूँ

 

मैं दफन हुई तो

इसलिए कि

कभी नहीं जन्‍मेगी सीता

राम की आत्‍मप्रशंसा

की अग्‍नि में

कभी नहीं झुलसेगी

सीता

 

लेकिन-

यहाँ तो रोज

जन्‍म लेते हैं राम!

स्‍वारथ के राम

महारथ के राम

सुख के राम

अपने दुःख के राम

रोज ही जलती हैं

सीतायें

 

परम्‍पराओं के नाम

पर

मारी जाती हैं

धकेली जाती हैं

फिर भी राम

एकबार फिर मैं

अयोध्‍या आना चाहती हूँ

 

उस शील निधि

मर्यादा पुरूषोत्तम

राम के लिये नहीं,

एक सरल-सहज

राम के साथ

उसके कांधे पर

सिर रखकर रोना

चाहती हूँ

राम अतीत के हैं बहुत पास

आज राम की आंखें हैं उदास

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डॉ. मनसा पाण्‍डेय

6 blogger-facebook:

  1. आज राम की आंखें हैं उदास
    bahut bahut sunder
    Aabhar......

    उत्तर देंहटाएं
  2. bahut achhi lagi...sir rakh ke rona chahti hun...touching

    kaifi azmi ki doosra vanvaas yaad aa gayi...

    उत्तर देंहटाएं
  3. Vedna bhi hai aur samvedna bhi...aur bhala kya chahiye

    Neelesh
    Mumbai

    उत्तर देंहटाएं
  4. Vedna bhi hai ...aur samvedna bhi aur bhala kya chahiye.

    Neelesh
    Mumbai

    उत्तर देंहटाएं
  5. mansa ji ko etnei achchi rachna ke liye sadhubad Mahendra bhishma

    उत्तर देंहटाएं
  6. mansa ji ki kavitaye dil ko chone or man ko vivash karne vali hoti he

    उत्तर देंहटाएं

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