पुरुषोत्तम व्यास की कविता - सुना सुना

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

DSCN5251 (Medium) (Custom)

सुना सुना

मन ही मन में

बुना बुना

मन ही मन में

खोये खोये

विचार चल रहे

अपने आप में

अथाह धधकती आग

भड़की

नस नस में

अभाव का घरोंदा

विचलित सा

मस्तिष्क भी जकडा जकडा

सोच के भी सोच नहीं

खोच के भी

खोच नहीं

मन की वेदना

तन मे समाई

घडी के कांटे

मन अटका

अतप्त सा

भटक भटक रहा

सूखे – झरने का

पथ

सूखा सूखा चारों ओर

भूखा- भूखा चारों ओर

सच्च

मृत्यु होना

जीवन

इस पर भावना का झमेला

उलटा पुलटा

सीधा सरल

सुख दुख

जीवन तो जीवन......।

--

पुरुषोत्तम व्यास

पत्ता झामनानी निवास

डा फजल दवाखाना के पास

क्वेटा कालोनी

नागपुर(महाराष्ट)

ई-मेल pur_vyas007@yahoo.com

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

0 टिप्पणी "पुरुषोत्तम व्यास की कविता - सुना सुना"

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.