बुधवार, 23 मार्च 2011

पुरुषोत्तम व्यास की कविता - सुना सुना

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सुना सुना

मन ही मन में

बुना बुना

मन ही मन में

खोये खोये

विचार चल रहे

अपने आप में

अथाह धधकती आग

भड़की

नस नस में

अभाव का घरोंदा

विचलित सा

मस्तिष्क भी जकडा जकडा

सोच के भी सोच नहीं

खोच के भी

खोच नहीं

मन की वेदना

तन मे समाई

घडी के कांटे

मन अटका

अतप्त सा

भटक भटक रहा

सूखे – झरने का

पथ

सूखा सूखा चारों ओर

भूखा- भूखा चारों ओर

सच्च

मृत्यु होना

जीवन

इस पर भावना का झमेला

उलटा पुलटा

सीधा सरल

सुख दुख

जीवन तो जीवन......।

--

पुरुषोत्तम व्यास

पत्ता झामनानी निवास

डा फजल दवाखाना के पास

क्वेटा कालोनी

नागपुर(महाराष्ट)

ई-मेल pur_vyas007@yahoo.com

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