मंगलवार, 8 मार्च 2011

हरीश निगम की बाल कविताएँ

clip_image002[4]

तितली और भौंरा

तितली रानी,

बड़ी सयानी,

बोली-भौंरे सुन!

 

ओ अज्ञानी,

पड़ी पुरानी,

तेरी ये गुनगुन!

 

कालू राजा,

खा के खाजा,

छेड़ नई-सी धुन!

---

 

भइया बस्‍ते जी

थोड़ा अपना वजन घटाओ

भइया बस्‍ते जी।

हम बच्‍चों का साथ निभाओ

भइया बस्‍ते जी।

clip_image003[4]

गुब्‍बारे से फूल रहे तुम

भरी हाथी से,

कुछ ही दिन में नहीं लगोगे

मेरे साथी से।

फिर क्‍यों ऐसा रोग लगाओ

भइया बस्‍ते जी।

 

कमर हमारी टूट रही है

कांधे दुखते हैं,

तुमको लेकर चलते हैं कम

ज्‍यादा रूकते हैं।

कुछ तो हम पर दया दिखाओ

भइया बस्‍ते जी।

---

 

clip_image002

डॉ. हरीश निगम

जन्‍म- 31 जुलाई 1955 (मैहर, सतना, म0प्र0)

शिक्षा- एम0एस-सी0 (रसायन शास्‍त्र), एम0ए0 (समाजशास्‍त्र), पी-एच0डी0

प्रकाशन- नवगीत संग्रह- 1. होंठ नीले धूप में

2. अक्षर भर छाँव

कहानी संग्रह- 1. हरापन नहीं लौटेगा

बालगीत संग्रह-1. टिंकू बंदर

बालकथा संग्रह-1. मिक्‍कू जी की लंबी दुम

इसके अतिरिक्‍त अनेक सहयोगी संकलनों तथा देश की प्रतिष्‍ठित पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

विशेष- 1. आकाशवाणी के विभिन्‍न केंद्रों से नवगीतों, नाटकों एवं अन्‍य विविध रचनाओं का प्रसारण।

2. कहानियों पर टेलीफिल्‍म का निर्माण

3. एन0सी0ई0आर0टी0 द्वारा प्रकाशित पाठ्‌य पुस्‍तकों में रचनाएँ सम्‍मिलित

संप्रति- प्राध्‍यापक एवं अध्‍यक्ष (समाजशास्‍त्र-विभाग)

शासकीय स्‍नातकोत्‍तर महाविद्यालय, सतना (म0प्र0)

संपर्क- बसेरा, प्रेम विहार कॉलोनी, प्रेमनगर, पोस्‍ट बॉक्‍स-96

सतना-485001(म0प्र0)

2 blogger-facebook:

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------