मंगलवार, 5 अप्रैल 2011

हरिहर झा की हास्य कविता - मायके में चिन्ता मेरी मत करना

मायके में

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मायके में खुश रहना चिन्ता मेरी मत करना

भाभी तेवर दिखलाये तो बिल्कुल ना डरना

 

ननद बनी तो राज तुम्हारा अपने घर में क्या डर

हुक्म चलाती रहना वह तो तेरे बाप का ही घर

 

यहां रोज हों हलवा पूड़ी मुझे बहुत ही खलता

मेरे घर का बजट तो सूखी रोटी से ही चलता

 

पूज्य पिता का पिस्ता काजू जो भी चाहे चरना

मायके में खुश रहना चिन्ता मेरी मत करना

 

जाने के इशारे पर तुम तुरंत गले मिल जाना

नाटक में ही दिल का दुखड़ा ऊंचे सुर में गाना

 

भैया और भतीजे नन्हे तुम्हें जान से प्यारे

कैसे उनको छोड़ पाओगी वे अखियों के तारे

 

भाभी काम करें तुम नल से पानी ना भरना

मायके में खुश रहना चिन्ता मेरी मत करना

 

झूठी शान बघारे जो सबकी नजरों मे चढ़ती

इसके उसके कान भरे तो घर में इज्जत बढ़ती

 

गारे की भी ननद बुरी कहावत सच करना

सीरियल देख पल्लवी का तुम रोल अदा करना

 

कहानी घर घर की सा सबके आगे देना धरना

मायके में खुश रहना चिन्ता मेरी मत करना

 

मेरा क्या मैं तो चंगा हूं आजादी से रहता

होटल में पब में मदिरा का सुन्दर झरना बहता

 

कसम है हर झूठे आंसू की हाथ नहीं हिलाता

बार गर्ल दिख जाय तो मैं आंख नहीं मिलाता

 

सच मानो पटाखों पर अब छोड़ दिया है मरना

मायके में खुश रहना चिन्ता मेरी मत करना ।

--

 

 

हरिहर झा

कृतियाँ - 1. “मदिरा ढलने पर” 2. “एगॉनी चर्न्स माय हार्ट”

विशेष - बोलोजी.कॉम अँगरेज़ी वेब-पत्रिका पर ’सप्ताह के कवि’ के रूप में सम्मान । सरिता व हिन्दी वेब पत्रिकाओं में लेख व कवितायें प्रकाशित । मेलबर्न में द्वैमासिक “साहित्य-संध्या” का नियमित आयोजन । हिन्दी-टंकण का प्रचार व प्रशिक्षण । ऑस्ट्रेलिया व भारत में रेडियो चैनल पर वार्ता व कविता पाठ । सृजनगाथा के लिये लेखन ।

सेवा - भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र के कम्प्यूटर-विभाग में वैज्ञानिक अधिकारी के पद पर कार्य करने के पश्चात में मेलबर्न के मौसम-विभाग में वरिष्ठ सूचना–तकनीकी अधिकारी के पद पर कार्यरत ।

संकलन में - “अंग अंग में अनंग”, “मृत्युंजय” , “बूमरैंग – ऑस्ट्रेलिया से कवितायें”, “गुलदस्ता”,

’हिडन ट्रेज़र” एवं “बाउन्डरी ऑफ़ दी हार्ट”

6 blogger-facebook:

  1. वाह वाह बहुत खूब्।

    उत्तर देंहटाएं
  2. liya hamhu tip rahal chhi.....

    jata dekhai chi tataya bihar.......


    pranam.

    उत्तर देंहटाएं
  3. हरिहर जी , पत्नी मायके में हो तब पति " मुक्ति पर्व " मनाता है . आपने किस तरह मनाया इस पर भी कविता कीजिएगा.वैसे आपने होटल और पब का जिक्र किया है. फिर भी श्रीमती जी के लौटने पर उनकी पूछ ताछ के ब्रह्मास्त्र का सामने कैसे करते है आप ?

    उत्तर देंहटाएं
  4. pllz view my blog kishordiwase.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह हरिहर भई वाह ! बहुत खूब लिखा है. बार-बाला के समक्ष हाथ बंधे रखेंगे और नज़रें भी नहीं मिलाएंगे तो साक़ी के हाथ से हाला का प्याला कैसे थामेंगे? पूज्य भाभीजी ने आपसे पूछा नहीं ?
    रमेश दवे

    उत्तर देंहटाएं

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