कृष्‍ण कुमार चन्‍द्रा की कविता - सवाल

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देश के हर एक जिले में जिन्‍दगी बहुत बदहाल है।

और आप पूछते हैं कि कोरबा जिले का क्‍या हाल है ?

कहीं ऐसा तो नहीं कि आप कोरबा के नब्‍ज़ को,

पहले से पकड़ कर बैठे हैं जनाब।

और हमें उकसाते हैं कि हम कहें,

इंकलाब जिन्‍दाबाद, जिन्‍दाबाद इन्‍कलाब।

कहां तो एक तरफ स्‍वास्‍थ्‍य के लिये,

अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर मुनादी चल रही है।

 

दूसरी ओर गरीबों के खातों में केवल,

बीमारी पल रही है।

हम नही उठायेंगे आवाज, जैसे-तैसे करके,

दो रोटी का जुगाड़ कर ही लेते हैं।

कभी बैंकों में, कभी सड़कों पर तो कभी बाजारों में,

लोगों का चैन, छीन ही लेते हैं।

अमीरों की प्रतिस्‍पर्धा में कोई टिक पाये,

किसी की क्‍या मजाल है ?

प्रदूषण फैलाने वालों की करतूतों से,

बेचारे शहतूत बदहाल हैं।

 

देश के हर एक जिले में जिन्‍दगी बहुत बदहाल है।

यदि आप चाहें तो हसदेव नदी के रेत पर,

क्रिकेट का मैदान बना सकते हैं।

कभी अल्‍हड़ता के साथ बहते नालों पर,

आज फुगड़ी खेल सकते हैं।

उबलते चावल का एक दाना काफी है, जनाब!

चावल की दशा बताने को।

यहां तो मैंने अनेक दानों को छुआ है,

और भी तो लोग हैं, बातें बताने को।

 

आदिवासियों पर छंटनी की तलवार लटकती,

किसी को कहां खयाल है ?

सड़कों पर मौत दौड़ती, रो-रो कर,

यमराज का भी बुरा हाल है।

देश के हर एक जिले में जिन्‍दगी बहुत बदहाल है।

बड़ी मुश्‍किल से शहर में,

जी रहे हैं लोग।

 

धूल को खाते और धुंआं को

पी रहे हैं लोग।

मजे में या मजबूरी में, होठों को-

सीते लोग, बहुत कच्‍चे हैं।

ढोल, नगाड़े, पिचकारी चुप,

मन मार के बैठे, हुड़दंगी बच्‍चे हैं।

होली के रंगों पर पानी का पहरा,

गोरी के गाल बदरंग, बेहाल है।

 

जले पर नमक छिड़कते हो,

बस इसी बात का तो मलाल है।

देश के हर एक जिले में जिन्‍दगी बहुत बदहाल है।

और आप पूछते हैं कि कोरबा जिले का क्‍या हाल है ?

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2 टिप्पणियाँ "कृष्‍ण कुमार चन्‍द्रा की कविता - सवाल"

  1. धूल को खाते और धुंआं को

    पी रहे हैं लोग।

    मजे में या मजबूरी में, होठों को-

    सीते लोग, बहुत कच्‍चे हैं।

    रवि जी सामाजिक हालत को व्यक्त करते सुन्दर रचना -बधाई हो

    उत्तर देंहटाएं
  2. amita kaundal2:12 am

    sach ko darshati sandeshmay sunder kavita
    badhai
    amita

    उत्तर देंहटाएं

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