मंगलवार, 19 अप्रैल 2011

एस के पाण्डेय की बाल रचना - केंचुआ

बच्चों के लिए: केँचुए का जीवन

image

(१)

पैर न होता केँचुआ के बिना पैर के चलता है ।

दौड़ न पाता धीरे-धीरे पेट के बल सरकता है ।।

माटी, कीचड़, खेत में रहता बरसात में ज्यादा दिखता है ।

सांप के बच्चे जैसा लगता पर बहु सीधा होता है ।।

 

(२)

हाथ से पकड़ो गिर-गिर जाए थोड़ा चिकना होता है ।

पत्ती, माटी खाकर जीता माटी में ही सोता है ।।

चिड़ियाँ भी इसको खा जाए पैर के नीचे दबता है ।

हल-ट्रैक्टर से खेतों में यह कटता, मरता रहता है ।।

 

(३)

लेकिन केँचुए में होती बहुत अधिक जीवटता है ।

दो भागों में कटने पर भी यह जीवित रह सकता है ।।

पत्ती, मिट्टी की बात ही क्या पत्थर भी हजम कर जाता है ।

पानी-वायु प्रवेश हेतु मिट्टी में राह बनाता है ।।

 

(४)

काम न आये कोई इसके सबके काम ये आता है ।

सीधा-साधा छोटा सा पर काम बड़ा कर जाता है ।।

मिट्टी को पोली करके उर्वरा शक्ति बढ़ाता है ।

पेड़-पौधे हैं जिससे बढ़ते उत्पादन बढ़ जाता है ।।

दबे-कटे-तड़फे फिर भी निज कर्तव्य निभाता है ।

केँचुआ जैसा जीव भी हमको परहित धर्म सिखाता है ।।

 

(५)

माटी में रहता, खाता, सोता अरु मर जाता है ।

माटी से देखो इसका कैसा अद्भुत नाता है ।।

केँचुआ अपने जीवन से हमको पाठ पढ़ाता है ।

अपनी माटी से प्रेम करो केँचुआ हमें सिखाता है ।।

 

---------

डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ. प्र.) ।

http://www.sriramprabhukripa.blogspot.com/

URL: https://sites.google.com/site/skpandeysriramkthavali/

*********

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------