गुरुवार, 14 अप्रैल 2011

पुरुषोत्तम व्यास की कविताएँ

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रसमय

रस रस

हर क्षण में

रस रस हर बात में ।

 

सुनता - कोई

कुछ – कहें

रस घोल जाता जीवन में ।

 

रसमय शाम सुहानी

रोम-रोम पुलकित – सा

गीत-कविता

रसमय हो जाती-कल्पना ।

 

नयन मूंद कर

मन-करता

डूबा – रहूँ रसमय पल में ।

 

सुमन-सुमन महक महक रहें

बह रही समीर सुहानी

मन करता

चल पडों बहुत दूर तक

रसमय शाम सुहानी

रस रस हर क्षण क्षण में ।

 

 

चाँदनी रात

मेरा चुपचाप सा बैठा रहना

याद मे खोये रहना

अब आदत हो गयी ।

 

हाथ में कलम हो

रजनीगंधा के फूल

सुमन और सुगंध

का अजीब स्नेह

अब आदत हो गयी ।

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