रविवार, 24 अप्रैल 2011

पुरूषोत्तम व्यास की कविता

अनुराधा

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टहलते टहलते

सोचते

शांत सी सरिता

आमों के बाग

रस भरी कोयल

कल्पना भी

कितनी संतुलित

कितनी आनंदमय

नाजुक सी पंखुड़ियों की तरह

अनुराधा

हंसती हुई

पलकों के किनारों पर

प्यार  खिलता हुआ

लालसा

हर दुख का कारण

रंगो की तरह

बदलते विचार

पूछने पर

बतलायेगें

कितने दिवस

कितने निशां

ह्दय पर

मोती मोती

शांत सा मन

पल्लव

कलियाँ और पुष्प

जीवन चक्र

बहती हुई सुगंध

स्मरण

कर पाओ तो

कर लो विश्लेषण -

अनुराधा

अपनी मन की बात कह पायेगी।

--

संपर्क

pur_vyas007@yahoo.com

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