गुरुवार, 21 अप्रैल 2011

प्रभुदयाल श्रीवास्तव की तीन व्यंग्य कविताएँ

ताल ठोककर ललकारें

कहीं कहीं पर डबल बेड है
कहीं कहीं पर खटिया टूटी
कहीं किसी का भाग्य सिकंदर‌
कहीं किसी की किस्मत फूटी|

कहीं कोई धरती पर सोता
कहीं बिछने नहीं बिछौने
कहीं किसी के बिस्तर दिखते
चिथड़े गंदे और घिनोने|

कहीं किसी का बिस्तर धरती
और गगन चादर होता है
ममता की छाती से चिपका
बच्चा बिलख बिलख रोता है|

कोई उड़ते नील गगन में
ए सी कारों में चलते हैं
कई किंतु अब भी ऐसे हैं
जो मीलों पैदल चलते हैं|

कहीं डिनर और कहीं लंच में
व्यर्थ ढेर भोजन जाता है
फिर भी कल्लू का बेटा क्यों
कई दिन भूखा रह जाता है|

कहीं भवन सौ मंजिल ऊंचे
कहीं झोपड़ी टूटी फूटी
बड़ा गजब का देश हमारा
इसकी है हर बात अनूठी|

कैसा अपना प्रजातंत्र है
कैसी अपनी सरकारें
आओ तिरंगा लेकर बच्चों
ताल ठोककर ललकारें| 

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है ईश्वर का दूत आदमी

एक शहर‌ में रह्ता था
एक बहुत कंजूस आदमी
पुरा मोहल्ले वाले कहते
कितना मक्खी चूस आदमी|

गली गली में होती चर्चा
है कितना मनहूस आदमी
बच्चे बच्चे तक कहते हैं
बिल्कुल ही फड़्तूस आदमी|

कभी मुफ्त में काम न करता
लेता हरदम घूस आदमी
खर्च न करता फूटी कौड़ी
कितना दकियानूस आदमी|

लातें घूंसे हरदम खाता
है कितना मजबूत आदमी
बच्चे हँसी ठिठोली करते
है कैसा ये भूत आदमी|

पता नहीं क्यों करता रहता
ऐसी ये करतूत आदमी
सच्चाई तो यह है बच्चो
है ईश्वर का दूत आदमी|  

---

 

भोलाराम का प्रजातंत्र

जब पवित्र पावक मनमोहक‌
दिन चुनाव का आता है
भोलाराम निकलकर घर से
वोट डालने जाता है| 

किसे चुने या किसे वोट दें
नहीं समझ वह पाता है
सौ का नोट उसे जो देता
वह उसका हो जाता है|

दो दिन पहले तक चुनाव के
लोग कई घर आते हैं
लालच देकर हाथ जोड़कर‌
हर कोई उसे मनाता है|

हर आने वाले से कहता
वोट तुम्हें ही हम देंगे
किंतु वोट किसको देना है
वही समझ न पाता है|

अंतिम दिन जो दर पर आकर‌
दारू और कंबल देता
बिना किसी भी सोच समझ के
वोट उसे दे आता है|

हर चुनाव में इसी तरह से
वोटर वोट दिया करते
इसीलिये तो भारत पुख्ता
प्रजातंत्र कहलाता है|

--

4 blogger-facebook:

  1. आपकी रचनाओं में करारे व्यंग्य छिपे हैं। आम आदमी को समम्वद्ध करना अच्छा लगा।

    उत्तर देंहटाएं
  2. बात सही है.. दारू जड़ में जाकर नींव मजबूत करती है..

    उत्तर देंहटाएं
  3. बेनामी7:36 pm

    दारु क‍बल गरीबों अनपढ़ों को देते है‍|काश वे भी पढ़े लिखे होते तो नहीं बिकते|

    पी एन श्रीवास्तव सिविल लाइंस सागर म्. प्र.

    उत्तर देंहटाएं
  4. बेनामी7:39 pm

    वाकई ऐसी दारू प्रजातंत्र को मजबूत करती है और बेईमान और भ्रष्ट नेता संसद और विधान सभा में पहुंचते हैं| अरुण खरे शाजापुर‌

    उत्तर देंहटाएं

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