बुधवार, 13 अप्रैल 2011

सुमित शर्मा की ग़ज़ल - तन्हाई

तन्‍हाई (गजल)

पलकों में आँसुओं को हमने, यूँ सहेजे रखा है,

शायद ये कल को मोती बन, तेरे गले का नूर हो।

 

मैं एक कहानी लिख रहा हूँ, तुम उसका मजमून हो,

क्‍या पता चर्चा-ए-किस्‍सा, कल बड़ा मशहूर हो।

 

उस अजनबी दरख्‍त को, मेरी निगाहें ढूँढती,

दर्द ये तन्‍हाई का, साये मैं जिसके चूर हो।

 

दुनियादारी का कायदा, अब तो जाए भाड़ में,

गर तुझे गर्दिश-भरा, मेरा जहां मंजूर हो।

 

इतने शख्सों की भीड़ में भी तन्‍हा रहूँगा मैं सुमित' ,

मुझसे अगर रूठा हुआ, मेरा खुदा ही दूर हो ।

 

 

-सुमित शर्मा

dवि परिचय-

नाम - सुमित शर्मा

जन्‍मतिथि - 31 जनवरी 1992

पता - ेध्‍व श्री मनोहर शर्मा, तहसील चौराहा,

गायत्री कालोनी, खिलचीपुर, जिला- राजगढ़(म.प्र.)

षिक्षा - बी.ई.-तृतीय वर्श (कम्‍प्‍यूटर साइंस) अध्‍ययनरत

साहित्‍यिक रचनाएँ चलती रहेगी मधुशाला(काव्‍य) , रिश्ते(उपन्‍यास), 30कविताएँ/गजले, लघु कहानियाँ ।(सभी अप्रकाशित)

9 blogger-facebook:

  1. प्रभावी अभिव्यक्ति ........

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  2. सुमित शर्मा की गजल अच्छी बन पडी है लेकिन पहला शेयर गजल से अलग और मतला नहीं बन पाया परिचय में वर्तनी की अशुदियाँ अखरती हैं कुल मिलाकर खूबसूरत

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर गज़ल....
    मतला यूं रखें--

    पलकों में आँसुओं को हमने, यूँ सहेजे रखा है,
    =
    हमने भी आसूं सहेज़े, तू भी शायद मज़्बूर हो।

    उत्तर देंहटाएं
  4. कदम-कदम बढ़ाए जा|

    उत्तर देंहटाएं
  5. कल 13/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत ही बढि़या शब्‍दों का संगम ।

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत ही गहनाभिब्यक्ति के साथ लिखी शानदार रचना बधाई आपको /





    please visit my blog
    www.prernaargal.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं

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