बुधवार, 13 अप्रैल 2011

एस के पाण्डेय की लघुकथा - विश्वास

कॉलेज में सीनियर छात्र जूनियर छात्रों का परिचय प्राप्त कर रहे थे। इसी सिलसिले में रामू से उसके सीनियरों ने पूछा कि अपने एक पॉजिटिव और एक निगेटिव पॉइंट के बारे में बताइये। रामू बोला मैं अक्सर लोगों की बातों पर आसानी से विश्वास कर लेता हूँ। यह मेरा सबसे बड़ा निगेटिव पॉइंट है। मैं इससे कई बार धोखा भी खा चुका हूँ। कुछ लोग इसका नाजायज फायदा भी उठा लेते हैं।

रामू आगे बोला कि मैं ईश्वर में विश्वास करता हूँ। यही मेरा सबसे बड़ा पॉजिटिव पॉइंट है। इससे मुझे बहुत बल मिलता है। यह सुनकर कुछ लोगों ने चुटकी लिया कि क्या बात है भाई, विश्वास ही पॉजिटिव पॉइंट और विश्वास ही इसका निगेटिव पॉइंट है। मतलब विश्वास ही सब कुछ है। सीनियरों में से एक ने कहा गुरु यह चालू पीस है। डिरेक्ट नहीं इनडिरेक्ट बोल रहा है। सुना है कि रीमा विश्वास से इसका चक्कर है। दूसरे ने कहा क्यों बे एक महीना भी नहीं हुआ और चक्कर चलाने लगा।

तीसरा बोला कि एचओडी सर ने स्ट्रिक्टली कहा है कि इंट्रोडक्सन के नाम पर रैगिंग नहीं होना चाहिए। इसलिए इसे जल्दी चलता करो अभी बहुतों को निपटाना है। चौथे ने कहा ऐसे कैसे चलता कर देंगे इसे स्पष्टीकरण देना होगा। उनमें से कोई बोला कि निगेटिव पॉइंट वाली बात तो मेरे समझ में आ गई। लोग आसानी से इसे चूना लगा देते होंगे। लेकिन पॉजिटिव पॉइंट वाली बात नहीं समझ सका। इसके बारे में समझाइए तो जरा।

रामू बोला मैं मानता हूँ कि भगवान जो करते हैं सो अच्छा ही करते हैं। जो देते हैं वही मिलता है। बस, हमें अपना काम ईमानदारी से करते रहना चाहिए। भगवान जो करेंगे हमारी भलाई के लिए ही करेंगे। इसी से कोई काम न बनने पर भी मुझे कोई टेंशन नहीं होता है और न ही मैं जल्दी दुखी होता हूँ।

अगर हम अपना कर्तव्य करते रहेंगे और साथ ही भगवान से प्रार्थना भी, तो जो चीज हमारे लिए बहुत ही आवश्यक होगी वह देर सबेर हमें मिल जायेगी। भले ही वह बदले हुए रूप में ही क्यों न मिले।

यह सुनकर कोई बोला बदले हुए रूप में मतलब रीमा न सही तो सीमा मिल जायेगी। एक ठहाका उठा और पहले वाले ने कहा गुरु मैंने तो पहले ही बता दिया था कि यह चालू पीस है।

इतने में सीनियरों में से एक छात्र जो सबकी अपेक्षा ज्यादा शांत था, एक सीरियस प्रश्न किया कि मान लीजिए तुम किसी नौकरी के लिए इंटरव्यू देने गए हो और तुम्हें नौकरी की सख्त जरूरत है। जैसा कि आज हम सबको है। लेकिन तुम्हारा सेलेक्सन नहीं होता है। तब भी तुम कहोगे कि भगवान ने हमारी भलाई के लिए सेलेक्सन नहीं होने दिया। तुम्हें बहुत खुशी होगी ! यह सुनते ही बहुत जोर का ठहाका गूँजा।

रामू ने मुस्कराते हुए उत्तर दिया हाँ मुझे दुःख नहीं होगा। मैं तब भी मानूँगा कि मेरी भलाई के लिए ही ऐसा हुआ है। मैं समझूँगा कि यह जॉब ऑफर मेरे लिए ज्यादा उपयुक्त नहीं था। इसलिए मेरे भगवान जो सब कुछ जानने वाले हैं, मुझे इससे बचा लिए और इससे भी अच्छी नौकरी मुझे अवश्य दिलाएँगे।

सभी लोग शांतचित होकर कुछ सोच रहे थे। रामू मुस्कराते हुए वहाँ से चला उसके चेहरे पर भी आत्म विश्वास झलक रहा था। शायद वह गुनगुना रहा था-

कवनिउ सिद्धि कि बिनु बिस्वासा।

बिनु हरि भजन न भव भय नासा।।

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डॉ. एस के पाण्डेय,
समशापुर (उ.प्र.) ।

URL: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

URL: https://sites.google.com/site/skpandeysriramkthavali/

Blog: http://www.sriramprabhukripa.blogspot.com/

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