सोमवार, 4 अप्रैल 2011

कृष्‍ण विहारी लाल पांडेय का एक हास्य-व्यंग्य गीत - वर्ष फल

वर्ष फल

बहुत अच्‍छा रहेगा श्रीमान का यह साल

ऐसा ज्‍योतिषी जी कह रहे हैं ।

आपका व्‍यापार फूलेगा फलेगा

हर तरफ बस आपका सिक्‍का चलेगा

आप होंगे और उदारवादी

देश अब कुछ निजी हाथों में पलेगा

शेयरों में अभी होगा और अधिक उछाल

ऐसा ज्‍योतिषी जी कह रहे है । बहुत अच्‍छा....

 

धर्म के प्रति आदमी की रूचि बढ़ेगी

अगरबत्‍ती और भी ज्‍यादा बिकेगी

पापियों का अन्‍त होगा अब धरा से

सिर्फ एक पवित्रता जीवित रहेगी

आपका ही तना होगा हर जगह पंडाल

ऐसा ज्‍योतिषी जी कह रहे हैं । बहुत अच्‍छा ....

 

कुछ जगह होंगे उपद्रव और दंगे

मौत नाचेगी कहीं पर नाच नंगे

बस्‍तियाँ जल कर भले ही राख हों पर

हर लपट में आप होंगे अधिक चंगे

आपका तूफान होगा आपका भूचाल

ऐसा ज्‍योतिषी जी कह रहे हैं । बहुत अच्‍छा ....

 

कहीं पर सूखा कहीं पर अतिवृष्‍टि होगी

भीख जैसी राहतों की सृष्‍टि होगी

मौसमों के हर बदलते तामक्रम पर

आपकी वातानुकूलित दृष्‍टि होगी

पैर होंगे नर्तकों के आपका सुरताल

ऐसा ज्‍योतिषी जी कह रहे हैं । बहुत अच्‍छा ....

 

आप जो कह दें वही इतिहास होगा

डगमगाता कदम नया विकास होगा

आपका अंजन लगा अन्‍धत्‍व को भी

अंधेरे में चमक का आभास होगा

एक छोटा ब्रेक फिर आगे बहुत सा हाल

ऐसा ज्‍योतिषी जी कह रहे हैं ।

बहुत अच्‍छा रहेगा श्रीमान का यह साल

ऐसा ज्‍योतिषी जी कह रहे हैं ।

 

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डॉ0 कृष्‍ण विहारी लाल पांडेय

उम्र

लगभग चौहत्‍तर साल

प्रकाशन

दो कविता संग्रह

सम्‍प्रति

स्‍नातकोत्‍तर महाविद्यालय से प्राध्‍यापक से सेवा निवृत्‍ति बाद स्‍वतंत्र लेखन

सम्‍पर्क

70, हाथीखाना दतिया मध्‍यप्रदेश 475661

09425113172

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