शनिवार, 30 अप्रैल 2011

प्रभुदयाल श्रीवास्तव की बाल कविता - मुन्ना भैया

मुन्ना भैया कितने अच्छे

मुन्ना भैया कितने पक्के

नहीं कहीं से भी दिखते हैं

किसी तरह के चोर उचक्के ।

 

सबसे ह‍ंस हंसकर मिलते हैं

बनते दोस्त सभी के पक्के

करते सदा मदद सबकी हैं

खाना पड़ें भले ही धक्के ।

 

सुबह सुबह ही योगा करते

तभी रखे हैं लाल गुलक्के

बात बात पर खूब हंसी के

रोज लगाते चौके छक्के ।

 

उन जैसे मिलते दुनियाँ में

हैं दुनियाँ में इक्के दुक्के

सदा व्यस्त रखते हैं खुद को

नहीं बैठते कभी दुबकके ।

 

सीखो हरदम चलते रहना

रुकना नहीं हरके थकके

करके अच्छे काम दिखाना

रह जायें सब हक्के बक्के ।।

 

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