गुरुवार, 7 अप्रैल 2011

प्रभुदयाल श्रीवास्तव की एक बाल कविता

आत्मोत्थान‌

पुस्तक और किताबों का है

अलग एक विग्यान‌

ध्यान लगाने से मिलता है

अच्छा अच्छा ज्ञान|

 

बड़े बड़े ऋषी मुनि यहाँ के

थे भारत की शान‌

सिखलाया सारी दुनिया को

अलग आत्म विज्ञान |

 

बाहर के अध्यन से मिलता

वाह्य मान सम्मान‌

किंतु आत्म अध्यन से होता

आत्म शांति का भान |

 

आत्म शांति मानी गई

सभी सुखों की खान‌

जिसने इसको पा लिया

हुआ आत्म उत्थान |

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