गुरुवार, 28 अप्रैल 2011

मिलन चौरसिया की कविता : ऐसा हुआ न कभी पहले

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दिल मेरा सम्हाले नहीँ सम्हले, 
ऐसा हुआ ना सनम कभी पहले ।
  दिल मेरा ये मेरा नहीँ लगता, 
इसपे जोर भी मेरा नहीँ चलता, 
क्या जतन करुँ कैसे ये सम्हले । 
ऐसा हुआ ना सनम कभी पहले ॥ 
 
अब ख्वाबोँ मेँ आने लगे हो,  
आग दिल मेँ लगाने  लगे हो,  
तेरी बातोँ से अब नहीँ बहले । 
ऐसा हुआ ना सनम कभी पहले ॥ 
 
बोलो कैसे फरेब दूँ मैँ इसको, 
कभी दे ना सका जो मैँ किसी को, 
क्या करुँ कैसे पगला ये सम्हले ।
ऐसा हुआ ना सनम कभी पहले ॥ 
 
नादाँ है हकीकत ना समझे, 
चाँद मांगे ये कीमत ना समझे, 
शायद ठोकर लगे तो ही सम्हले । 
ऐसा हुआ ना सनम कभी पहले ॥             
 
(मिलन चौरसियाः मऊःउत्तर प्रदेश )

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