शनिवार, 23 अप्रैल 2011

प्रभुदयाल श्रीवास्तव की बाल कविताएँ

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रेल यात्रा

यदि रेल से बच्चों तुमको
किसी जगह पर जाना हो
आधा घंटे पहले घर से
होकर तैयार रवाना हो।

स्टेशन पर जाकर तुमको
रेल टिकिट लेना होगी
मांगो खिड़की पर बाबू से
तुम्हें जिस जगह जाना हो।

पैसों और टिकिट को रखना
किन्हीं सुरक्षित जेबों में
ध्यान सदा जेबों पर रखना
जेबें अगर बचाना हो।

बहुत भीड़ होती रेलों में
कम से कम सामान रखो
ताकि जल्दी से डिब्बे में
किसी तरह चढ़ जाना हो।

हो सकता है तुरत फुरत ही
तुमको जगह न मिल पाये
हो सकता है जाना तुमको
खड़े खड़े पड़ जाना हो।

अगर कहीं गुंजाइश दिखती
कि तुम जाकर बैठ सको
हो स‌क‌ता कोई मिल‌ जाये
जो जाना प‌हिचाना हो।

प्राय: न‌म्र निवेद‌न‌ से तो
लोग‌ ज‌ग‌ह‌ दे देते हैं
किंतु याद‌ र‌ख‌ना होगा
व्य‌व‌हार‌ स‌दा मित्राना हो।

य‌दि राह‌ में कोई मुसाफिर‌
कुछ खाने को देता है
म‌त‌ खाना य‌दि देने वाला
बिल‌कुल‌ ही अंजाना हो।

च‌ल‌ती गाड़ी से ब‌च्चों तुम‌
म‌त‌ क‌भी उत‌र‌ना ज‌ल्दी में
भ‌ले साम‌ने तुम‌को दिख‌ता
अप‌ना ठौर‌ ठिकाना हो।

स्टेश‌न‌ की चाट‌ पकौड़ी

क‌भी भूल‌क‌र‌ खाना म‌त‌
लेना भोज‌न‌ बिल‌कुल‌ सादा
य‌दि भूख‌ ल‌गे कुछ‌ खाना हो।

वैसे तो म‌म्मी पापा के
संग‌ ह‌मेशा जाते हो
चुस्त‌ तुम्हें र‌ह‌ना होगा
अग‌र‌ अकेला जाना हो।

'---

मेरी नींद नहीं खुल पाती


मुझको नींद बहुत है आती सुबह सुबह।
मेरी नींद नहीं खुल पाती सुबह सुबह।

मम्मी टेर लगातीं उठने उठने की
पापा की बातों में धमकी पिटने की
दोनों कहते जल्दी शाला जाना है
नल चालू है उठकर शीघ्र नहाना है
पर मुझको तो नींद सुहाती सुबह सुबह
मेरी नींद नहीं खुल पाती सुबह सुबह।

म‌म्मी तो उठ‌ जातीं मुँह‌ अँधियारे में
पापा ट‌ह‌लें सुब‌ह‌ सुब‌ह‌ ग‌लियारे में
मेरे हाथ‌ हिलाते सिर‌ को स‌ह‌लाते
दादा दादी उठो उठो य‌ह‌ चिल्लाते
आल‌स‌ आता नींद‌ स‌ताती सुब‌ह‌ सुबह
मेरी नींद नहीं खुल पाती सुबह सुबह।

दादा दादी मुझ‌को य‌ह‌ स‌म‌झाते हैं
अच्छे लोग‌ सुब‌ह‌ ज‌ल्दी उठ‌ जाते हैं
ब‌ड़े स‌बेरे मुर‌गा बांग‌ ल‌गाता है
रोज‌ निय‌म‌ से सूर्य‌ उद‌य‌ हो जाता है
य‌ही बात‌ चिड़िया चिल्लाती सुब‌ह‌ सुब‌ह‌
मेरी नींद नहीं खुल पाती सुबह सुबह।

अब‌ मुझ‌को ल‌ग‌ता है कुछ‌ क‌र‌ना होगा
किसी त‌र‌ह‌ भी सुब‌ह‌ सुब‌ह‌ उठ‌ना होगा
रात‌ देर‌ त‌क‌ न‌हीं आज‌ से जागूंगा
टेलीविज़‌न‌ देख‌ना अब‌ मैं त्यागूंगा
बात‌ स‌म‌झ‌ में प‌र‌ न आती सुब‌ह‌ सुब‌ह‌
मेरी नींद नहीं खुल पाती सुबह सुबह।

--

3 blogger-facebook:

  1. bahut sundar likha hai, bahut samay bad bachchon ke liye aisi rachna padhne ko mili

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत अच्छा लगा आपके ब्लॉग पे आने से बहुत रोचक है आपका ब्लॉग बस इसी तह लिखते रहिये येही दुआ है मेरी इश्वर से
    आपके पास तो साया की बहुत कमी होगी पर मैं आप से गुजारिश करता हु की आप मेरे ब्लॉग पे भी पधारे
    http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. मुझसे संपर्क बनाये रखें
      प्रभुदयाल श्रीवास्तव 09713355846 , 07162 247632 पर बात कर सकते हैं

      हटाएं

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