मंगलवार, 10 मई 2011

हलीम ‘‘आईना’’ की हास्य व्यंग्य कविताएँ


हास्य-व्यंग्य

दीक्षा-मंत्र


नियमों के नियामक

सिद्धान्तों के रक्षक

आमजन हितैशी

अर्थात् देश में परदेशी,

नये-नये

आला अफसर को

तब लगा जोर का झटका,

जब पी.ए.ने

एक माह बाद ही ट्रांसफर-फैक्स

टेबल पर लाकर पटका।

साहब हैरान, परेशान!

मन ही मन बोले- ‘‘वाह रे भगवान!
ईमानदारी का यह इनाम...?’’

तभी अनुभवी बूढ़े पी.ए.ने
गुरूमंत्र कान में फूंका-
‘‘साहब गाँधीगिरी को छोड़कर
फ्रेम-पेटर्न को समझो,
आपकी ईमानदारी का फोटो
बेईमान तंत्र के फ्रेम में
नहीं आ रहा है,
फ्रेम में फिट करने के लिए
आपको
राजधानी भिजवाया जा रहा है।
होली-दीवाली
तीज-त्यौहार राजनैतिक तांत्रिकों के
चरण दबाओगे,
तो कुएं में भांग
घोलने का मंत्र
स्वतः सीख
जाओगे...?’’


पेपर-पेटर्न

कृपया भगवान के लिए
इतनी-सी कृपा करें,
भारतीय इतिहास के
पेपर-पेटर्न को बदलकर
अब पर्चे में कुछ ऐसे प्रश्न भी धरें-

‘भारत का प्रथम
घोटाले बाज कौन था?
अब तक के प्रमुख
घोटालीवीरों का
सप्रसंग वर्णन करें।’


नेक सलाह

थानेदार जी ने
चोर को डाँटा,
सीधी अँगुली से
घी नहीं निकला तो
मार दिया चाँटा।

गालियों की बरसात
करते हुए चीखे-
‘‘अबे, उल्लू के पट्ठे !
तूने थाने के सामने ही
चोरी क्यों की थी ?’’

चोर सुबकते हुए बोला-
‘‘सच्ची-सच्ची
बताऊँ सर !
यह नेक सलाह मुझे
एक पुलिस वाले ने ही
दी थी ...?’’

हलीम ‘‘आईना’’
निकट बी.एड.कॉलेज, सकतपुरा
कोटा-324008 (राज.) इण्डिया
haleemaaina@gmail.com

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------