अभिषेक की 'आज के जमाने की सर्वाधिक प्रायोगिक और सर्वथा मौलिक कविता!'

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amritlal vegad ka collage

आज मेरा दिन बन गया
आज बाई आई है
घर सज गया, खाना बन गया
आज बाई आई है
कपडे धुल गए, तह हो गए
आज बाई आई है

पूरी रचना यहाँ पढ़ें -

http://abhishekrao137.blogspot.com/2011/05/blog-post.html

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(चित्र - कोलाज अमृतलाल वेगड़)

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1 टिप्पणी "अभिषेक की 'आज के जमाने की सर्वाधिक प्रायोगिक और सर्वथा मौलिक कविता!'"

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