सुभाष नीरव के बारह हाइकु

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(1)
बहता पानी
सुनाता है सबको
एक कहानी।

(2)
सखी री सुन
दुख यूँ खाए जैसे
गेहूँ को घुन।

(3)
बापू की चिंता
कैसे ब्याहे बिटिया
सर पे कर्जा।

(4)
माटी की गंध
अपने वतन की
खींचे मन को।

(5)
अपना दु:ख
पहाड़ – सा लगता
ग़ैर का बौना।

(6)
किसका डर
संकट में संग हो
तुम अगर।

(7)
मन में कुछ
होंठों पर कुछ, है
छल- प्रपंच।



(8)
बीज जो बोये
घृणा के तब, प्रेम
कहाँ से होये।


(9)
खोजा बाहर
था अपने अन्दर
कस्तूरी सम।

(10)
दु:ख में तुम
इस तरह मिले
ज्यूँ रब मिले।


(11)
ओस की बूंदें
खूब रोया रात में
आकाश जैसे।


(12)
जग है सूना
प्रियतम के बिन
दु:ख है दूना।

00

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10 टिप्पणियाँ "सुभाष नीरव के बारह हाइकु"

  1. एक से बढ़कर एक
    अपने में पूर्ण
    जैसे कहते एक कहानी।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सभी हाईकू बहुत बढ़िया , एक से बढ़ कर एक

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुभाष नीरव के सभी हाइकु प्रभावित करने वाले हैं । जो अच्छी कविता रचते हैं , वे अच्छे हाइकु भी लिख सकते हैं । नीरव जी ने अपने इन हाइकुओं से सिद्ध कर दिया है -

    दु:ख में तुम
    इस तरह मिले
    ज्यूँ रब मिले।

    ओस की बूंदें
    खूब रोया रात में
    आकाश जैसे।

    उत्तर देंहटाएं
  4. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 17 - 05 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    http://charchamanch.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  5. सभी हाइकू अच्छे हैं लेकिन पहले वाले दो हाइकू अति सुंदर क्योंकि इनमे काफिये का पूरा ध्यान रखा गया है .... बधाई |

    उत्तर देंहटाएं
  6. अमिता कौंडल3:59 am

    सभी हाइकु बहुत सुंदर हैं

    बापू की चिंता
    कैसे ब्याहे बिटिया
    सर पे कर्जा।

    माटी की गंध
    अपने वतन की
    खींचे मन को।

    अपना दु:ख
    पहाड़ – सा लगता
    ग़ैर का बौना।
    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति है आपके हाइकु हमेशा ही सुंदर होते हैं.
    बधाई
    सादर,
    अमिता कौंडल

    उत्तर देंहटाएं
  7. अमिता कौंडल4:00 am

    सभी हाइकु बहुत सुंदर हैं

    बापू की चिंता
    कैसे ब्याहे बिटिया
    सर पे कर्जा।

    माटी की गंध
    अपने वतन की
    खींचे मन को।

    अपना दु:ख
    पहाड़ – सा लगता
    ग़ैर का बौना।
    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति है आपके हाइकु हमेशा ही सुंदर होते हैं.
    बधाई
    सादर,
    अमिता कौंडल

    उत्तर देंहटाएं
  8. आशा जी, आपने तो बहुत सुन्दर हाइकु लिख दिया मेरे हाइकु की प्रशंसा में, आभारी हूँ। देवेन्द्र पांडे, संगीता जी, हिमांशु जी, एम वर्मा और अमिता जी का भी मैं बहुत आभारी हूँ कि जिन्होंने मुझ नौसिखिये हाइकुकार के हाइकु पसंद किए और अपनी राय से अगगत कराया।

    उत्तर देंहटाएं

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