सोमवार, 16 मई 2011

सुरेन्द्र अग्निहोत्री की कविता

bhattal parsol surendra agnihorti ki kavita (Custom)

भट्‌टल, परसौल

जिसका नहीं सत्‍ता ले रही थी मोल

 

गांधी को रास्‍ते पर चल रहे थे किसान

लगातार मिलता रहा अपमान

 

उन्‍होंने भी बदला रास्‍ता

पुलिस ने दिया कानून का वास्‍ता

 

शुरू हो गया खूनीखेल

बदले में मिली जेल

 

मुद्‌दा फिर वही का वह रह गया

राजनीति की भेंट संघर्ष चढ़ गया

 

राहुल ने दिखाई राह

सत्‍ता की निकल गई आह

 

सुलगने लगा नया सवाल

कब तक अन्‍नदाता रहेगा फटे हाल

 

अलीगढ़ दो हजार दस का पन्‍द्रह अगस्‍त,

सांप फुफकारते रहे सत्‍ता समारोह में व्‍यस्‍त।

 

अन्‍नदाता डेढ़ पखावाड़े से सत्‍याग्रह पर,

सत्‍ता की राइफल्‍स ने ढ़ाया जमकर कहर।

 

प्रतुल के शब्‍दों में भूख की बातें भूल जाओ,

कानूनी शासन पहले खाओ।

 

धरती पुत्रों ने किया आत्‍मबलिदान,

अन्‍नदाताओं को एक जुटता का दिया ज्ञान।

 

रक्षक आकर नही कह पायेंगे दौड़,

घर,खेत आंगन और हल को छोड़।

 

एकता के पंख ने सिंगूर को छुड़ाया,

अब अलीगढ़, मथुरा की बारी है।

 

त्रासदी गाथायें अब नही लिखना पड़ेगी,

अन्‍न उपजाने वाला की बात सुनना पड़ेगी।

 

नही चलेगा अन्‍याय पूर्ण न्‍याय,

पूंजीपति के कुफलपक्ष का अध्‍याय।

हलधर के कुफलपक्ष का अध्‍याय।

 

हलधर है धरती का भाग्‍य विधाता,

गैंडे की चमड़ी को कर्तव्‍य याद दिलाना आता।

 

आक्रोशित आंखें जब भभक पड़ेगी,

हर खेत से धूं-धूं कर लपटें उठेंगी।

 

तक कैसा होगा रास और कैसे रंग,

राजधानी तक हो जायेगी आंच से बदरंग।

 

बन्‍द करो गान, माफ न हो उनकी कजा,

लोक के साथ जुड़ों, धनपशुओं को दो सजा,

 

इतिहास की पगडंडियों में मिलते लाला बांके लाल,

इनकी कविता थी पगड़ी संभाल ओय जट्‌टा पगड़ी संभाल।

 

अंग्रेजों की किसान विरोधी नीतियों का था इन्‍हें मलाल,

पंजाब के किसानों ने प्रेरणा लेकर अंग्रेज का किया हलाल।

 

पिचके पेट, अधफटे कपड़े वाले चेहरे,

चाहे जितने हुक्‍कामों, बिठा दो पहरे।

 

अकूत मुनाफाखोरों की दाल अब नहीं गल पायेगी,

अन्‍याय शोषण भ्रष्‍टाचार का नंगा नाच नहीं कर पायेगी

 

जिसके दादी और पिता ने शहादत पायी है,

उसने किसानों के घर जाने की हिम्‍मत दिखायी है।

 

जिनकी मातमपुर्सी करने और हिफाजत की जिम्‍मेदारी है।

वो दूतों के दम पर अपनी बता रहे लाचारी है।

 

श्रम पुत्रों, अन्‍नदाताओं का मिट्‌टी पर गिरेगा खून लाल,

इतिहास गवाह है नहीं चल पायेगा आपातकाल।

 

अगस्‍त क्रान्‍ति का माह किसान क्रान्‍ति की चल रही नाव,

सिंगूर के बाद देश में आ गया नया बदलाव।

 

Surendra Agnihotri (Custom)

-सुरेन्‍द्र अग्‍निहोत्री

राजसदन-120/132 बेलदारी लेन लालबाग,

लखनऊ

3 blogger-facebook:

  1. bhai surendra ji aapne to bahut kam shabdo me bahut kuch kah diya... aaj ke halat es kadar kkharab hote ja rahe ... kuch karna hoga nahi to aane vali pidhi hame kabhi maaf nahi karegi .. achchi kavita ke liye aapko sadhubad.. samaj ko chetane va sudharne me patrakar, lekhak.,kavi.. evam samast bodhik verg ko ekjut ho aavaj udhani hogi tabhi desh ,samaj, vyakti ka bhala ho sakega..Mahendrea Bhishma.. Lucknow 08004905043

    उत्तर देंहटाएं
  2. bahut hi saral sbdon me atoot satya.........

    उत्तर देंहटाएं

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