रविवार, 22 मई 2011

कृष्‍ण कुमार चन्‍द्रा की हास्य व्यंग्य कविताएँ

हास्य व्यंग्य hasya vyangya

मांग

मैंने खुदा से मांगा कि,

सारी दुनिया का दुःख,

मुझे दे दो।

मेरे चाहने वालों को,

सारी दुनिया का,

मात्र सुख दे दो।

तब खुदा ने कहा,

तुमने जो मांगा,

मैंने दिया है अब तक,

पर तुम्‍हारी ये मांग,

मैं कदाचित्‌,

पूरी नहीं कर सकता।

तुम्‍हे दुःख के मारे,

घायल होते,

नहीं देख सकता।

तुम्‍हारे अपनों को,

खुशी के मारे,

पागल होते,

नहीं देख सकता।

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विश्‍वास

बहुत आसान है,

किसी का दिल,

किसी का खिलौना,

किसी के विश्वास को,

तोड़ देना।

इसलिये ये आसान काम,

हम नहीं करते ।

हमें तो चुनौती भरा कार्य,

करने की आदत है,

इसलिये जोड़ते हैं,

दिलों को दिल से।

दिल जो जुड़ते हैं,

बड़ी मुश्किल से।

मजे की बात ये कि,

हम कभी नही थकते ।

जोड़ते जोड़ते खिलौनों को,

हम कभी नहीं ऊबते।

विश्वास कायम है, इसलिये,

मंझधार में भी नहीं डूबते।

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कमाई

पागलों की भीड़ में कहीं,

आपका पदार्पण न हो जाये।

डरता हूं पापा कहीं मेरा,

अपहरण न हो जाये।

हद से ज्‍यादा की कुछ भी-

कामना नहीं है आपसे,

बस इतना कमा कर लाइये,

जिससे भरण-पोषण हो जाये।

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कृष्‍ण कुमार चन्‍द्रा

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