बुधवार, 4 मई 2011

पुरुषोत्तम व्यास की कविताएँ

जीवन से जोड़े रखता

पल भर देखा

लगा जैसे

वह मुझे टटोल रही

या

अपने आप को

मुझमें खोज रही

एक-तरंग

एक-लहर

एक-झरना

एक-गीत

प्यार भरा......।

 

स्वप्न उसी के

क्यों

किसके- लिये

किस-कारण

कितने-विचार

संभलता ही नही

एक नजर

कितनी हलचल

उथल-पुथल

पहाड़ – के

उस-पार

एक-झरना

फूट पडा

अंतरमन

सोया हुआ प्यार जगा

 

जुड -गया

खिल-गया

मिलन-

प्यार को अभिव्यक्त करना

हर एक बस में नहीं

कितने – सुंदर से

कितने अपने

खुशियाँ चहकेंगी

खुशियों मे सुगंध

खुशियों की नदियाँ

खुशियों का झरना

उसके पास जाओ

उससे कह दूं

दूर भी नहीं

पास भी नहीं

पर उसकी आंखों का प्यार

जीवन से जो़ड़े रखता.......।

 

प्यार भरी कविता

मुझे प्यार भरी कविता लिखना

मन की मधुर सी बातें

कागज में उकेरना अच्छा-लगता ।

ह्दय को ह्दय जोड

प्रणय पुष्प खिलना

सुख या दुख

अधरों पर मुस्कान भर

गीत गुनगुनाना अच्छा लगता ।

नही हैं-उसको मुझसे

प्यार-

प्यार उसी से करना अच्छा लगता......।

अगर प्रभुजी बातें-करते

अगर प्रभुजी बातें-करते

पक्षपात के आरोप उन-पर लगते

इंद्रधनुष का रंग  बदल जाता

कौवे न्याय की दुहाई  करते

तारे सब-चंद्रमा बन जाते ।

प्रभुजी बडे सहमे-सहमे रहते

अपनी मर्जी रह नहीं सकते

अगर प्रभुजी बातें-करते ।

पर, प्रभुजी बडे चतुर खिलाड़ी

चुपचाप  गगन में वह  रहते

अकसर वह सोचा करते

अगर किसी से वे  बातें करते । 

--

ई-मेल pur_vyas007@yahoo.com

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