प्रभुदयाल श्रीवास्तव की कविताएँ

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प्रभुदयाल श्रीवास्तव

टांगो उनको फाँसी पर‌

 

सबके सब हैं साले नेता।

उसके सब घरवाले नेता।

 

धोती कुर्ता टोपी पहने

सबके देखे भाले नेता।

 

इधर उधर बिखरे हैं ऐसे

ज्यों मकड़ी के जाले नेता।

 

जनता में फिट बैठे जैसे

दीवालों में आले नेता।

 

कहीं नहीं है भेद वर्ण का

कोई गोरे कोई काले नेता।

 

डाकू तस्कर चोर मवाली

कई कई गुंडे पाले नेता।

 

जहां कहीं भी हित दिखता है

पल में बदले पाले नेता।

 

अपने को गंगा बत‌लाते

पर हैं गंदे नाले नेता।

 

अब तो जनता खुलकर कहती

करते गड़बड़ झाले नेता।

 

कई तो अब नासूर बन चुके

मुंह के अंदर छाले नेता।

 

पल भर में अरबों खा जाते

यूं ही बैठे ठाले नेता।

 

देखो उसको नज़र गड़ाके

पता नहीं कब खाले नेता।

 

टांगो उनको फांसी पर जो

करते बड़े घुटाले नेता।

 

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जहर पिलाके हाल न पूछ‌

 

जहर पिलाके हाल न पूछ‌

हूं कितना बेहाल न पूछ

 

तुझसे पलभर मिलकर ही

कितना हुआ लाल न पूछ

 

किसकी ओढ़ी नेता ने

किस नेता की खाल न पूछ

 

दिन भर में कितना लूटा

डाकू ने कोई माल न पूछ

 

कांटे बिछे हैं राहों में

कैसे चले कमाल न पूछ

 

कैसे कैसे प्रश्न किये

विक्रम से बैताल न पूछ

 

प्रश्नों की दूकान जली

मुझसे कोई सवाल न पूछ

 

उत्तर की कोई आस नहीं

अब कोई प्रश्न दयाल न पूछ

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मेरी कविता
काम प्रेम श्रंगार नहीं मेरी कविता में
धूप दीप अंगार नहीं मेरी कविता में
मेरी कविता तो कल कल निश्छल सरिता है
सागर का संसार नहीं मेरी कविता में|

मंद मंद मुस्कान ओंठ पर जब आती है
हृदय दीप में ज्योति अचानक जल जाती है
तेरे सपनों से मिलते जब मेरे सपने
बिना नींद के रात अचानक ढल जाती है
जितना लेता दुगना उससे वापिस करता
कहीं कोई आभार नहीं मेरी कविता में|

देखो तो पल भर मेरी देहरी पर आकर
खड़ा मिलूंगा प्रेम द्वार पर नयन बिछाकर
कतरे कतरे में भी तुमको पुष्प मिलेंगे
देखोगी जब तन्मयता से नयन झुकाकर
अक्षर अक्षर में गूंथा है मैंने तुमको
शब्द कोई बेकार नहीं मेरी कविता में|

सागर के तल में सीपी को किसने देखा
मिटा सका है कौन कभी ब्रह्मा का लेखा
कहते हैं हाथों में सबके लिखा भाग्य है
माया ने फिर मोह जाल सिर पर क्यों फेंका
एक एक पल सच्चाई में जीना सीखा है
झूठों का संसार नहीं मेरी कविता में।

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1 टिप्पणी "प्रभुदयाल श्रीवास्तव की कविताएँ"

  1. दोनों ही कवितायें बहुत खुबसूरत हैं |नेताओं के लिए तो
    जो लिखा है है, कमाल का है| दूसरी कविता में भी
    विचारों की अभिव्यक्ति खुबसूरत अंदाज़ मव की गयी
    है | आप बधाई के पात्र हैं |

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