रविवार, 22 मई 2011

पुरूषोत्तम व्यास की कविताएँ -

पुरूषोत्तम व्यास की कविताएँ

फोटो फ्रेम

उसको क्या पता

उसके बिना कैसे रहता

वह

रह लेती होगी

उसके बिना-

हर क्षण अधूरा-सा लगता-

उसका-स्मरण

घोर अंधकार की ओर ले जाता

फिर उस-

फोटो फ्रेम को देखता

जिसमें उसकी तस्वीर

लगी हैं

जो मेरे संग नहीं..........

 

नीलम-सा अम्बर

दुःख-गजल-गीत और कविता,

जीवन की महक बन –गये ।

इस-पार या उस-पार,

चलती-समीर बार-बार । ।

भीगी-भीगी-सी भोर,

ओस होती-यादों की ।

मैं-चलता-साया चलता,

जलता ह्दय-धुआँ नही होता हर-बार ।।

अम्बर-होता नीलम-सा,

मेघों की सुंदर-सी पेंटिंग,

भीगी-भीगी होती धरा,

झूल-रही होती-कविता ।।

7 blogger-facebook:

  1. बेहतरीन रचनायें\ खास कर दूसरी रचना बहुत अच्छी लगी। धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  2. फोटो फ्रेम को देखता
    जिसमें उसकी तस्वीर
    लगी हैं
    जो मेरे संग नहीं..........।
    kya sunder bhav hai
    मेघों की सुंदर-सी पेंटिंग,
    भीगी-भीगी होती धरा,
    झूल-रही होती-कविता ।।
    sunder bhav
    saader
    rachana

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुन्दर दर्द भरी विरह की अभिव्यक्तियां, मुबारकबाद।

    उत्तर देंहटाएं
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  5. अमिता कौंडल1:07 am

    फिर उस-

    फोटो फ्रेम को देखता

    जिसमें उसकी तस्वीर

    लगी हैं

    जो मेरे संग नहीं..........


    अम्बर-होता नीलम-सा,

    मेघों की सुंदर-सी पेंटिंग,

    भीगी-भीगी होती धरा,

    झूल-रही होती-कविता ।।
    वाह बहुत खूब लिखा है सुंदर शब्द रचना है बधाई

    सादर
    अमिता कौंडल

    उत्तर देंहटाएं

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