सोमवार, 23 मई 2011

मिलन चौरसिया के गीत

मिलन चौरसिया के दो गीत

मुझे खबर करो

 

मेरी कसम तुझे सनम बेखबर, मुझे खबर करो।

तुम हो कहाँ मेरी सनम बेखबर, मुझे खबर करो॥

कोई खबर नहीं मिल रही तेरी सनम, हाँ मेरी सनम,

दिल रोए तुम्‍हारे लिए आठों पहर, मुझे खबर करो।

तुम हो कहाँ ........................................................॥

 

कोई खबर नहीं तेरी मेरे पास है, दिल उदास है,

कैसी हो कहाँ हो मेरी जाने जिगर, मुझे खबर करो।

तुम हो कहाँ........................................................॥

 

तुम जहाँ भी रहो जाँ आबाद रहो, नाबाद रहो,

खुदा करे तुझे कभी कोई हो ना फिकर, मुझे खबर करो।

तुम हो कहाँ.........................................................॥

 

शाहजादी हो मेरा दिल हो दिल का ताज हो, मुमताज हो,

बेहिस न होगा सनम तेरा ताजमहल, थोड़ा सबर करो।

तुम हो कहाँ..............................................................॥

 

इनायत नजर

जाने कब होगी उनकी इनायत नजर।

आज भी हैं हम उनके ही मुन्‍तजर॥

 

कोई जाने नहीं वो आयेंगे कब,

ये जाने खुदा या जाने वो रब,

करें कैसे उन्‍हें हाल ए दिल की खबर।

जाने कब होगी....................................॥

 

वो आयें साथ में जब कोई आये बयार,

तन ले अँगड़ाई मन में उमड़े प्‍यार,

दिल मचले जैसे बल खाये लहर।

जाने कब होगी ................................॥

 

लगे आहट जरा भी नैना बहके,

मिले खुशबू जरा भी तन मन महके,

उठे दिल में कसक जब वो जायें गुजर।

जाने कब होगी ....................................॥

 

---

 

सनम बिन

तुम बिन सनम अपना ए हाल है।

पल भर भी जीना सनम कितना मुहाल है॥

 

कैसे कटेगा दिन ए कैसे महीना,

बिन सनम अब तो मुष्‍किल है जीना,

दर्द ए जुदाई से दिल अपना बेहाल है।

पल भर भी.............................................॥

 

दिल का सकून गया खो गया करार है,

तुम बिन सनम मेरा जिया बेकरार है,

ना है जवाब कोई कैसा ए सवाल है।

पल भर भी...........................................॥

 

कैसा है रोग ए, कैसा ए बुखार है,

मन भर का बोझ जैसे दिल पे सवार है,

दिल का है रोग ए तो जी का जंजाल है।

पल भर भी...............................................॥

--

सफल जनम होगा

जब उनके जैसा सनम होगा ।

ये प्‍यार कभी नहीं कम होगा॥

यौवन से भरा हो बदन उनका,

खुशबू से महकता हो तन उनका,

अपना भी एक सनम होगा ।

ये प्‍यार कभी.......................॥

 

नयनों में उनके नयन होवे,

उम्‍मीद पे बढ़ता कदम होवे,

जब निर्मल निश्छल मन होगा।

ये प्‍यार कभी............................॥

 

हो चंचल शोख सनम अपना,

फूलों से भरा हो चमन अपना,

तब प्‍यार ही धरम करम होगा।

ये प्‍यार कभी............................॥

 

हर शिफ्‍त चैन वो अमन होवे,

दिलवर से अपना मिलन होवे,

तब निश्चय सफल जनम होगा।

ये प्‍यार कभी..........................॥

 

..

दीवाना ना मिलेगा

हम जैसा कोई दिलवर दीवाना ना मिलेगा।

माजी में भी कोई ऐसा अफसाना ना मिलेगा॥

हर चेहरे में तेरी ही सूरत नजर आती है,

हर एक बुत में तेरी ही मूरत नजर आती है,

तेरी आँखों सा कोई सागर सयाना ना मिलेगा।

हम जैसा कोई...................................................॥

 

पत्‍ता भी कोई खड़के दिल मेरा धड़कता है,

तुम आ रहे हो शायद दिल मेरा कहता है,

तेरी आहट की मौसिकी सा तराना ना मिलेगा।

हम जैसा कोई..................................................॥

 

झुरमुटों से हवा सरके लगे तुम आये,

मस्‍त भौंरा भी गुनगुनाए लगे तुम आये,

तेरी मुस्‍कान सा पल कोई सुहाना ना मिलेगा।

हम जैसा कोई.............................................॥

 

आवारा जुल्‍फों से पलकें तेरी उलझती हैं,

ऐ दिलकश तेरे बदन से कस्‍तूरी महकती है,

शम्‍मा को करे रोशन वो परवाना ना मिलेगा

हम जैसा कोई............................

---

मिलन चौरसिया, मऊ, उ0 प्र0

1 blogger-facebook:

  1. सभी गाने बढ़िया............फ़िल्मी अन्दाज़ में हैं...........फिल्मों के लिए मुफीद हैं

    धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

और दिलचस्प, मनोरंजक रचनाएँ पढ़ें-

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------