कृष्ण गोपाल सिन्हा की ग़ज़ल

हमें गहराइयाँ अच्छी लगे है

 

ग़मों का बोझ अब खलता नहीं है,

हमें नाक़ामियाँ अच्छी लगे है.

 

हमारे वास्ते तुम रुक न पाए,

हमें रुसवाइयां अच्छी लगे है.

 

उन्हें हो साथ ग़ैरों का मुबारक,

हमें तनहाइयाँ अच्छी लगे है.

 

हमारे पाँव में दमख़म बहुत है,

हमें ऊँचाइयाँ अच्छी लगे है.

 

हमारे ज़ख्म की बातें न पूछों,

हमें गहराइयाँ अच्छी लगे है,

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संपर्क- 'अवधप्रभा',61,मयूर रेज़िडेंसी,लखनऊ-226016

E-mail: kgsinha2007@rediffmail.com

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3 टिप्पणियाँ "कृष्ण गोपाल सिन्हा की ग़ज़ल"

  1. अमिता कौंडल1:11 am

    उन्हें हो साथ ग़ैरों का मुबारक,

    हमें तनहाइयाँ अच्छी लगे है.

    हमारे ज़ख्म की बातें न पूछों,

    हमें गहराइयाँ अच्छी लगे है,
    बहुत सुंदर लिखा है बधाई

    सादर
    अमिता कौंडल

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