मंगलवार, 17 मई 2011

शशांक मिश्र ‘‘भारती'' के बालगीत

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एकः-

साक्षरता अभियान

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गधे राम जी पहन पजामा

पहॅंच गए स्‍कूल

ढेचूं- ढेचूं करना छोड़ दिया

आयेगें रोज स्‍कूल,

सर्व शिक्षा अभियान चल रहा

मैं निरक्षर न रह जाऊं,

आप लिखें यदि नाम मेरा तो

रोज ही स्‍कूल आऊं,

दुनिया गई अन्‍तरिक्ष तक

कम्‍प्‍यूटर की हैं बातें,

मैं निरा मूर्ख ठहरा जो

अनपढ़ रह बितायी रातें,

मैंने किया है अब निश्‍चय

बोझा नहीं उठाऊंगा,

पहले करूंगा अक्षर ज्ञान

साक्षर बनके दिखाऊंगा,

गधेराम जी हूं पर मैं भी

साक्षरता अभियान चलाऊंगा

पढ़ें-पढ़ायें का नारा दूंगा

साक्षर जंगल बनाऊंगा ।

दोः-

आया मौसम गरमी का

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पक गये गेहूं खुली धूप है

आया मौसम गरमी का

भरी हुई गुल्‍लक को तोड़ो

आया मौसम गरमी का

आइसक्रीम को अब खायें

भाये मौसम गरमी का

तेज धूप अब भाती नहीं

आया मौसम गरमी का

छाया में ही खेलो-खाओ

आया मौसम गरमी का।

तीनः-

गरमी वाली शाम

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आ गई भइया फिर से देखो

गरमी वाली शाम

धूल उड़ाये पसीना बहाये

न बिल्‍कुल आराम

ठण्‍डी चीजें मन को भायें

आयी है ऐसी शाम

बाहर से भागे आए अन्‍दर

सता रही गरमी की शाम

आ गई भइया फिर से देखो

गरमी वाली शाम॥

चारः-

गरमी के दिन

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आने वाले अब है भइया

बड़े और भारी से दिन,

जिन में जीना उठना बैठना

होगा काफी ही मुश्‍किल,

यें कड़ी धूप को लाते है

छुट्‌टी से सबको भाते हैं,

जाड़े को पीछे भगाकर

मई और जून में यह आते हैं,

फलों के राजा आमों के संग

यह आकर बहार फैलाते हैं।,

लस्‍सी-शरबत और बरफ ले

गरमी के दिन आते हैं।

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पांचः-

बरसा रानी

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बरसा जब जब आती है

सर-सर गाना गाती है

मेढकों को बुलाकर के

टर्र-टर्र-टर्र करवाती है

सबके मन को भाये जो

मोर का नाच दिखाती है

काली घटायें लाकर के

शीतल जल बरसाती है

हरियाली फैलाने को

बरखा रानी आती है।

छः

नित्‍य कर्म

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कितना प्‍यारा-कितना न्‍यारा,

भाई-बहन का प्‍यार हमारा।

रोज सुबह हम जल्‍दी उठते,

नित्‍य कर्म से शीघ्र निपटते।

समय से हैं विद्यालय जाते,

साथ-साथ घर वापस आते।

एक साथ हैं घर में रहते,

कभी न आपस में झगड़ते।

साथ-साथ हम खाना खाते,

उसके बाद हैं खेलने जाते।

गृह कार्य भी जल्‍दी करते,

कभी नहीं हम सर से डरते।

कितना प्‍यारा-सौभाग्‍य हमारा,

है भारत माँ सा देश हमारा।

सातः-

आगे इसे ले जाना है.........

यह देश हमारा धरती अपनी

हम सब इसकी संतान,

आगे इसे ले जाना है

दीपक प्रेम का जलाना है।

बिगुल बजाया था बापू ने

नेता सुभाष के जादू ने

क्रान्‍ति वीर बन जाना है

धरा यहां की सोना उगले

अहिंसा स्‍वंय हिंसा को निगले

ऐसा इसको बनाना है

आगे इसे ले जाना है

कौटिल्‍य और कृष्‍ण की भूमि

उनके ही आदर्शों को भूली

स्‍मरण पुनः करवाना है

आगे इसे ले जाना है

विहान नया हमने है पाया

अनगिनत शत्रु मार भगाया

दिल से दिल को जलाना है

आगे इसे ले जाना है.....।

आठः-

चिड़िया

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नन्‍हें-नन्‍हे पंखों वाली,

बगिया में है आती चिड़िया,

तरह-तरह से करतबों से है

बच्‍चो को बहलाती चिड़िया,

दूर देश से दाने लाकर

बच्‍चे खूब खिलाती चिड़िया,

चूँ-चूँ की आवाज सुनाकर

बोल के वृद्ध हँसाती चिड़िया।

रोज सबेरे फुदक-फुदक के

मेरे आँगन आती चिड़िया

जब पकड़ने को हूँ जाता

फुर्र से उड़ जाती चिड़िया॥

नौः-

अच्‍छे बच्‍चे

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साहस का तुम दीप जलाकर

अपने पथ पर बढ़ते जाओ

मन में दुर्गुणों को तुम

शुभ कर्मों से दूर भगाओ

बाधाओं से कभी न डरना

निर्भय आगे बढ़ते जाओ,

ले सन्‍देश कर्मवीरों का

अपना यश जग में फैलाओ

कार्यों की अच्‍छाइयों से तुम

अच्‍छे बच्‍चे नित कहलाओ।

दसःः-

समाचार पत्र

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सारे संसार की घटनाओं को लिए

हर सुबह-सुबह को आता

कुछ नयी तो कुछ पुरानी

कुछ आश्‍चर्य की बात बताता

समाचार है जग का सूरज

जो रोज सुबह उग आता

सूर्य की किरणों के समान ही

समाचारों को है फैलाता

सूर्य देता प्रकाश संसार को

तु ज्ञान समाचारों का देता

सबका है प्‍यारा-सबका न्‍यारा

सबे मन को हरषाता

होकर के कागज का चिट्‌ठा

है समाचार पत्र कहलाता।

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सम्‍पर्कः- शशांक मिश्र ‘‘भारती ''

दुबौला-रामेश्‍वर -262529

पिथौरागढ़ उत्‍तराखण्‍ड

1 blogger-facebook:

  1. शशांक मिश्र ‘‘भारती'' ji ke ye sabhi prastut 10 बालगीत bahut hi achhe lage... prastuti ke liye aabhar..

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