शुक्रवार, 3 जून 2011

कहानी संग्रह - 21 वीं सदी की चुनिन्दा दहेज कथाएँ - लालसा

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कहानी संग्रह

21 वीं सदी की चुनिन्दा दहेज कथाएँ

संपादक - डॉ. दिनेश पाठक 'शशि'

अनुक्रमणिका

1 -एक नई शुरूआत - डॉ0 सरला अग्रवाल
2 -बबली तुम कहाँ हो -- डॉ0 अलका पाठक
3 -वैधव्‍य नहीं बिकेगा -- पं0 उमाशंकर दीक्षित
4 - बरखा की विदाई -- डॉ0 कमल कपूर
5- सांसों का तार -- डॉ0 उषा यादव
6- अंतहीन घाटियों से दूर -- डॉ0 सतीश दुबे
7 -आप ऐसे नहीं हो -- श्रीमती मालती बसंत
8 -बिना दुल्‍हन लौटी बारात -- श्री सन्‍तोष कुमार सिंह
9 -शुभकामनाओं का महल -- डॉ0 उर्मिकृष्‍ण
10- भैयाजी का आदर्श -- श्री महेश सक्‍सेना
11- निरर्थक -- श्रीमती गिरिजा कुलश्रेष्‍ठ
12- अभिमन्‍यु की हत्‍या -- श्री कालीचरण प्रेमी
13- संकल्‍प -- श्रीमती मीरा शलभ
14- दूसरा पहलू -- श्रीमती पुष्‍पा रघु
15- वो जल रही थी -- श्री अनिल सक्‍सेना चौधरी
16- बेटे की खुशी -- डॉ0 राजेन्‍द्र परदेशी
17 - प्रश्‍न से परे -- श्री विलास विहारी

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लालसा

कुहेली भट्‌टाचार्य

रात के ढ़ाई बजे, ममता वेलफेयर एसोसिएशन के प्रेसिडेन्‍ट नमिता के घर फोन की घंटी बजी। उत्तम नगर में एक शादीशुदा औरत जोकि मात्र 19 साल की थी उसे उसके पति ने दहेज के लिए जिन्‍दा जला डाला। वो भी घर के बाहर सब लोगों की आँखों के सामने। वहाँ की पुलिस भी कोई कार्यवाही नहीं कर रही है। सुनते ही नमिता का खून खौल उठा। उसने कमिश्‍नर पुलिस को फोन लगाया और साथ ही साथ वेलफेयर के बाकी मेम्‍बर को खबर दे दी। सब इकट्‌ठे होकर चल पड़े उत्तम नगर की तरफ। जहाँ पर अब भी जले हुए शरीर का कुछ हिस्‍सा पड़ा हुआ है। देखते ही सबके रोंगटे खड़े हो गए। उन लोगों के पहुँचते ही स्‍थानीय पुलिस भी हरकत में आ गई। अब तक क्‍यों चुप बैठी थी पुलिस ये तो सबको ही पता है पर अब जब बात नौकरी पर आ पहुँची तो वे भी काम पर लग गये। उस लड़की का शौहर जिसका नाम राजेश था। सबके सामने अपनी बीवी को जलाकर बड़े ही गर्व के साथ निकल गया, जैसे कोई बहुत बड़ा और महान वीरता का काम करके निकला हो।

अड़ोस-पड़ोस से जितनी बातों को इकट्‌ठा किया गया उससे पता चला राजेश मोतिया को बहुत दिनों से तंग कर रहा था। बोल रहा था ‘तेरी माँ ने कहा था स्‍कूटर देगी पर कहाँ है स्‍कूटर? अब तो मैं मोटरसाइकिल ही लूंगा। जा अपनी माँ के पास, ले आ मेरी मोटरसाइकिल।'

मोतिया की माँ घर-घर में काम करके अपना गुजारा करती थी।

थोड़ा-थोड़ा पैसा इकट्‌ठा करके बेटी की शादी करा दी। राजेश को सरकार से झोपड़ी के बदले पच्‍चीस गज जमीन मिली। उस पर उसने छोटा सा घर बना लिया। देखने सुनने में भी लड़का अच्‍छा था। मोतिया की माँ ने सोचा, बेटी सुखी रहेगी। इसलिए अपना सबकुछ देकर अपने जिगर के टुकड़े की शादी करके विदा किया और सोचा था थोड़ा-थोड़ा करके पैसे इकट्‌ठे करके एक साल में एक सेकेण्‍ड हैंड स्‍कूटर खरीद देगी। पर बीमार पड़ गई। जितने भी पैसे इकट्‌ठे किये थे सब दवाईयों में चले गये। ऊपर से कमजोरी की वजह से काम पर भी नहीं जा सकी। इसलिए अब तक स्‍कूटर के पैसे इकट्‌ठे नहीं कर पाई। उसे पता था राजेश उसकी बेटी के साथ मार पिटाई करता है। पर वो क्‍या करती बेबस।

तबियत थोड़ी ठीक होते ही काम पर लग गई ताकि अपनी बेटी को इस दर्दनाक हालत से बचा सके। लगभग पैसे इकट्‌ठे भी हो गये थे, कुछ ही कम थे। अब राजेश मोटर साइकिल माँग बैठा कहाँ से लाती। दो-तीन दिन पहले राजेश ने मोतिया की जमकर पिटाई की और माँ के पास भेज दिया। फिर मोतिया की माँ ने तय कर लिया ये जो छोटा सा घर है इसी को बेच डालेंगी। उसकी जिन्‍दगी किसी भी तरह कट ही जायेगी। पर उसने मोतिया को कुछ नहीं कहा। बस इतना ही कहा मैं दो चार दिन में ही मोटर साइकिल के पैसे लेके तेरे घर में आऊँगी।

उसे बोल, और दो-चार दिन सब्र कर ले।

राजेश को सब्र ही कहाँ था। उसे तो ये आश्‍वासन झूठा ही लगता था।

उसके सामने एक ही तरकीब थी, दूसरी शादी और इसके लिए मोतिया को मरना ही था। अपनी इच्‍छा को पूरा करने के लिए आक्रोश से भरपूर राजेश एक नरभक्षी बन गया और मोतिया को बाँधकर मिट्‌टी के तेल से नहला दिया। उसे अपनी गुंडागर्दी पर नाज था। वो जानता था अड़ोस-पड़ोस के लोग उससे डरते हैं।

इसलिए अपने घर को बचाने के लिए बाहर लाकर मोतिया के शरीर को आग लगा दी। मोतिया चीखी चिल्‍लाई पर कोई भी हिम्‍मत करके उसे बचाने नहीं आया।

जल-जल कर चिल्‍ला-चिल्‍लाकर देखते ही देखते मांस-पिण्‍ड में बदल गई।

उसकी एक साल की शादीशुदा जिन्‍दगी की यही भयंकर परिणति हुई।

वेलफेयर के सभी लोग रस्‍ते में ही खड़े थे और पुलिस राजेश को पकड़कर ले आई। इतने में मोतिया की माँ हाथ में एक पोटली लेकर आ गई। आकर ठीक उसी जगह खड़ी हो गई जिससे दो कदम दूरी पर उसके जिगर का टुकड़ा जला भुना कर मार दी गई थी। उसे कुछ भी पता नहीं चल रहा था वो सब कुछ सुन रही थी। पर जैसे उसका दिमाग काम ही नहीं कर रहा था। जैसे ही पुलिस राजेश को लेकर वहाँ पहुँची वो कहने लगी ‘मैंने घर बेच दिया, ये ले अपनी मोटरसाइकिल का पैसा। अब मेरी बेटी को तंग नहीं करेगा ना? ले पैसा ले ।

वहाँ पर खड़े सभी इंसानों की आँखें नम हो गई। सब सोच रहे थे इस बेचारी ने तो अपनी बेटी को सुखी बनाने के लिए उसकी शादी रचाई थी.....!

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123 ए., सुन्‍दर अपार्टमेण्‍ट,

एच-10, नई दिल्‍ली-87

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