रविवार, 19 जून 2011

शोभा रस्तोगी शोभा की लघुकथाएँ

shobha rastogi shobha
पार्षद लघुकथा-१ 
राधा का भाई शिवराम निगम चुनाव में खड़ा था | आस थी पार्षद बनने की | घर के सभी
सगे सम्बन्धी चुनाव प्रचार में जुटे थे | आज हरिजन मोहल्ले का दौरा करना था |
हरिजन बस्ती में घुसते ही राधा की नाक-भों चढ़ने लगी | शिवराम ने देखा तो बहन
को धमकाया ,' अरी राधा ! मुझे इनसे वोट लेने है |'
'ठीक है , भैया !' कहकर राधा सामान्य होने की कोशिश करने लगी | सभी जगतिया के
घर में घुस गए | जगतिया ने चाय मंगवाई | 'क्या भैया !इसके घर की चाय ?मेरा तो
जी ख़राब हो रहा है |' राधा भाई के कान में फुसफुसाई |'ओह राधा !तू सारा खेल
बिगाड़ देगी | मुझे पार्षद बन जाने दे | फिर तू जगतिया की चाय का कसैला स्वाद
भी भूल जाएगी|'
शिवराम ने धीरे से कहा | 
'अच्छा भैया! अब समझ गई |कह्कर राधा चाय की 
चुस्कियां लेने लगी | 
 
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 रोशनी लघुकथा-२
'देख अम्मा ,तेरी पोती आई है तेरो अपरेसन करवे|' 
'है ? मेरी पोती?' बुढिया की आँखों में हैरानी थी |
'हाँ , जे बोई पोती है जाके जनम पे तेने कितना रार मचाई|'
सफल आपरेशन के दो दिन उपरांत अम्मा को घर ले जाया गया | 
'कैसी हो ,मेरी अम्मा |' डॉ पोती ने दादी का हाल पूछा | 
'अरे लल्ली ! तेने मोय बचा लियो | तेरे हाथ जोरूँ| मैने तोसे कहा - कहा न कहयो
| हमारे खानदान में तेरे नाम को परकास फ़ैल रह्यो है | कोईछोरा डागदर
न बनो पर तू बन गयी | मोय तोपे घमंड है |'
'अम्मा, छोरी रोशनी होती है | रोशनी को कितने भी अंधकार में रख लो - एकाध किरण
तो फूट ही पड़ती है और जीवन के लिए एक ही किरण काफी होती है |' 
'सच्ची कही बेटा ! छोरी रोशनी होवे है |'
 
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ईमेल - shobharastogishobha@gmail.com 
परिचय
-- 
नाम- शोभा रस्तोगी शोभा
शिक्षा - एम. ए. [अंग्रेजी , हिंदी ], बी. एड. , शिक्षा विशारद, संगीत प्रभाकर
[तबला ]
जन्म - २६ अक्तूबर १९६८ , अलीगढ [उ. प्र. ]
सम्प्रति - अध्यापिका
पता - आर. जेड. डी.-- २०८, बी, डी. डी. ए. पार्क रोड, राज नगर - || पालम
कालोनी, नई दिल्ली - ७७
 १९८५ से पंजाब केसरी, राष्ट्र किंकर, हम सब साथ साथ, केपिटल रिपोर्टर,कथा
संसार, सर्वोत्तम रीडर्स डाइजेस्ट, बहुजन विकास, न्यू ऑब्जर्वर पोस्ट, कथादेश,
दैनिक जागरण आदिअन्य में पत्र, लघुकथा, कविता, कहानी, लेख आदि प्रकाशित | '
खिडकियों पर टंगे लोग ' में लघुकथाएं संकलित | ह्ससासा द्वारा अ. भा. लघुकथाकार
सम्मान प्राप्त |आकाशवाणी भोपाल से लेख प्रसारित |
 वर्तमान में लेखन जारी|
 लघुकथा.कॉम व सृजनगाथा.कॉम में प्रकाशित लघुकथाएं
  

15 blogger-facebook:

  1. बेनामी5:57 pm

    very good shobhaji.

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (20-6-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  3. रचनाओं का व्यंग्य और सन्देश दोनों बेहतरीन है !

    उत्तर देंहटाएं
  4. दिल को छु लेती हैं दोनों लघु कथाएं. बधाई हो शोभा जी.

    उत्तर देंहटाएं
  5. अच्छी संदेशपरक कथायें ......

    उत्तर देंहटाएं
  6. dono hi rachanaayen alag alag hai aek main satic byang hai aur aek main insaaniyat hai.dono hi rachanayen bahut hi achchi likhi hain aapne bahut bahut badhaai.


    please visit my blog.thanks.

    उत्तर देंहटाएं
  7. सार्थक सन्देश देती सुन्दर लघु कथाएं..

    उत्तर देंहटाएं
  8. shobha rastogi shobha7:00 pm

    sabhi ki pratikriya prapt huee. rachna pasand karne ke liye bahut-bahut shukriya. --- shobha rastogi shobha

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सशक्त सार्थक और व्यंग्य और चुभन लिए दोनों रचनाएं .आभार .

    उत्तर देंहटाएं
  10. दोनों ही लघुकथाएं बहुत सुंदर और सार्थक ....स्थानीय भाषा के प्रयोग ने इसे वास्तविकता से जोड़ दिया है बहुत बधाई |

    उत्तर देंहटाएं
  11. शोभा जी आपकी लघुकथा राजनीति और सामाजिक सोच पर करारा प्रहार करती है.आज के समय में जबकि कहानी कथा और कविता के पाठकों का आभाव लगातार बढ़ रहा है ऐसे में रचनाकार जेसे पोर्टल साहित्य और अच्छे लेखको को इस माध्यम से सामने ला रहे है.ऐसे संपादक ,लेखक,पोर्टल को चलाने वाले बधाई के पात्र हैं पोर्टल को चलाना कोई आसान काम नहीं और वोह भी बिना किसी आर्थिक मदद के.प्रिंट मीडिया का हमेशा यह रोना रहता है की साहित्य के पाठक नहीं हैं -बिन विज्ञापन किसी पत्र -पत्रिका को केसे चलाये.के जवाब में आज के दोर में जिन मित्रों और साहित्यकारों के माध्यम से इस तरह के पोर्टल चल रहे हैं और लेखकों को एक सार्थक मंच दिया जा रहा है-सभी बधाई के पात्र हैं.रचनाकार को पुन बधाई.
    आरिफ जमाल....

    उत्तर देंहटाएं
  12. आपकी लघुकथाएं सोच को जन्म देती हैं...
    सार्थक लेखन के लियें बधाई आपको ....

    उत्तर देंहटाएं

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