गुरुवार, 30 जून 2011

अनीता मिश्र की कविता - कितने दुखी हो तुम

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क्‍या तुम्‍हारा दुख उससे बड़ा है ?

सात साल की वो मासूम

जो कचरे के ढेर से

एक जोड़ी चप्‍पल मिलने पर खुश है

अपनी छोटी बहन को पहना कर

नाप देखती, फिर उतारती

फिर पहनाती और ......................

मायूस हो जाती ,सही माप न आने पर

फिर लग जाती अपने काम में

जैसे समझ लिया हो नंगे पांव

चलना ही उसकी नियति हो

क्‍या तुम्‍हारा दुख उससे बडा है ?

 

वो बूढ़ा जो उस भव्‍य शामियाने के

बाहर खड़ा है उम्‍मीद से कि

शादी के बाद बचा खाना

शायद फेंका जाए तो

कुछ खाना उसे भी मिल सके

पर यहां कुछ आधुनिक तरह का भोज

जिसे पर प्‍लेट पे सिस्‍टम कहा जाता

सो कुछ भी बाहर ना फेंका गया

भूखे या आधे पेट रहना ही

उसकी नियति है मान लिया उसने

क्‍या तुम्‍हारा दुख उससे बडा है ?

 

जो बारह वर्ष की उम्र में

पढ़ाई छोडकर दस घरों का

चौका बर्तन करती है ,जिससे

उसके बाकी के चार और

भाई बहनो का भर सके पेट

कभी कभी काम वाले घरों में

खिलौनों और किताबों को

उम्‍मीद से देखती है, फिर

फ्राक मोड़ काम में जुट जाती

जैसे कि अब यही उसकी नियति है

क्‍या तुम्‍हारा दुख

इन सबसे बडा है ?

 

अगर तुम्‍हे अब भी लगता है

कि हाँ..............तो ,तुम

इस पृथ्वी के सबसे दुखी व्‍यक्‍ति हो

कि तुम्‍हारे पास जीवन जीने की

मूलभूत चीजें भी नहीं है

और तुम इन सबसे भी

गए बीते हालात में हो

तब तो तुम्‍हें बेशक मर जाना चाहिए

मर ही जाना चाहिए।

 

अनीता मिश्रा

10 blogger-facebook:

  1. वाह बेहतरीन भवव्यक्ति बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  2. गरीबी की विवषता और ग़रीबी में जीने की हिम्मत की सार्थक और शिक्षाप्रद अभिव्यक्ति के लिये बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  3. very nice ..... best of luck for your future.....

    उत्तर देंहटाएं
  4. deepak mishra6:17 pm

    very-very nice such a good job

    उत्तर देंहटाएं
  5. zeenat3:42 pm

    bht khub.......tum itna acha likhti ho aaj malum hua......keep it up.....

    उत्तर देंहटाएं
  6. Devendra Singh7:41 pm

    Very truthful description of poverty,touch the heart very deeply.

    उत्तर देंहटाएं
  7. ...Dil ko chu jane wali gaherai hai aapki kavita me....vry2 nice di....

    उत्तर देंहटाएं
  8. मायूस हो जाती ,सही माप न आने पर

    फिर लग जाती अपने काम में

    जैसे समझ लिया हो नंगे पांव

    चलना ही उसकी नियति हो

    क्‍या तुम्‍हारा दुख उससे बडा है ?

    जवाब नही आपका..लाजवाब बहुत ही भावप्रवण और हृदयस्पर्शी रचना.......

    उत्तर देंहटाएं

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