उषाकिरण किरण की ग़ज़ल

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usha kiran kiran ki gazal

ग़ज़ल

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1-बारिश से मिलती तरुणाई अच्‍छी लगती है,

सनन सनन चलती पुरवाई अच्‍छी लगती है ।

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2-सारी नदियाँ बहनों जैसी हैं आपस में,

ज्ञान ध्‍यान में गंगामाई अच्‍छी लगती है ।

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3-सांझ सकारे लड़वाती है पेंच नये,

गुरवत की ऐसी शहनाई अच्‍छी लगती है ।

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4-अन्‍यायी के आगे कभी ना शीश झुके,

झूठों के आगे सच्‍चाई अच्‍छी लगती है ।

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5-भीड़ हटी तो चिन्‍ताओं के बादल सी,

संग मेरे चलती तन्‍हाई अच्‍छी लगती है ।

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6-हिंदी उर्दू वंशबेल है पाठ्‌यक्रमों की,

अकबर के संग जोधाबाई अच्‍छी लगती है ।

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7-मुशकिल में कुछ खट्‌टे मीठे अनुभव की किरण,

मौला तेरी ये पहुंनाई अच्‍छी लगती है ।

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उषाकिरण किरण

कवियत्री गणेश चौक

छिंदवाडा म0प्र0

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1 टिप्पणी "उषाकिरण किरण की ग़ज़ल"

  1. भीड़ हटी हो चिन्ताओं की बादल सी,
    संग मेरे चलती तन्हाई अच्छी लगती है।

    बहुत ख़ूब।

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