रविवार, 19 जून 2011

हिमकर श्‍याम की पितृदिवस विशेष कविता

प्राणों पे उपकार पिता के

जीवन के आधार में
लयबद्ध संस्‍कार में
नाम में, पहचान में
झंझावतों, तूफान में
प्राणों पे उपकार पिता के

डांट में, फटकार में
प्‍यार और दुलार में
बंदिशों, नसीहतों में
सबकी जरूरतों में
कांधे पर हैं हाथ पिता के

मनचाहे वरदान में
हर आंसू, मुस्‍कान में
अनजाने विश्‍वास में
सुरक्षा के अहसास में
मत भूलो अहसान पिता के

सादगी की सूरत में
करूणा की मूरत में
जीने के शऊर में
अम्‍मा के सिंदूर में
निश्‍छल हैं जज्‍बात पिता के


सिंधु सी लहक में
शौर्य की दमक में
अद्‌भुत संघर्ष में
अथाह सामर्थ्‍य में
अलहदा ख्‍यालात पिता के


देह के आवरण में
नेह के आचरण में
रिश्‍तों के बंधन में
वंदन और नमन में
चरणों में कायनात पिता के

 

हिमकर श्‍याम
द्वारा ः एन. पी. श्रीवास्‍तव
5, टैगोर हिल रोड, मोराबादी,
रांची ः 8, झारखंड।

8 blogger-facebook:

  1. मनचाहे वरदान में
    हर आंसू, मुस्‍कान में
    अनजाने विश्‍वास में
    सुरक्षा के अहसास में
    मत भूलो अहसान पिता के

    --बेहतरीन प्रस्तुति .

    उत्तर देंहटाएं
  2. पिता का साया ही बहुत होता है, ऐसा हमारी तरफ कहा जाता है. और यह पूरी तरह सत्य भी है.

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत बेहतरीन रचना| धन्यवाद|

    उत्तर देंहटाएं
  4. पितृ दिवस पर हमारी भी बधाईयां

    उत्तर देंहटाएं
  5. आप सबों का हार्दिक आभार.
    आपकी प्रतिक्रियाएं उत्साह बढ़ातीं हैं.
    स्नेह बनाएं रखें.

    उत्तर देंहटाएं
  6. खूबसूरत रचना, बहुत सुंदर अभिव्यक्ति.

    उत्तर देंहटाएं
  7. often, it happens that kid (as we remain kids before our parens) does not remain as close to father, in comparision to mother. Thank god its a friendly relation with both of my parents.

    ये प्रस्तुति बहुत अच्छी है, और खास पिता के लिए है. आप स्वस्थ रहें और ऐसे ही लिखते रहें. ढेर सरे प्यार के साथ. आपका भाई रोहित.

    उत्तर देंहटाएं
  8. बेनामी7:47 pm

    इस श्रद्धा भाव को नमन.

    उत्तर देंहटाएं

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