रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

हरदीप कौर सन्धु की कविता सांदलबार ताँका

हरजीत कौर संधु

आज मैं सांदलबार की बात करने जा रही हूँ जहाँ मेरा ननिहाल परिवार भारत - पाकिस्तान के बटवारे से पहले रहता था |

आज मै उस सांदलबार को देखने की तमन्नाओं की बेकरारी लिये यह ताँका पेश कर रही हूँ .......

1.

दिखला दे माँ

मुझे सांदलबार

तू खेली जहाँ

लायलपुर उसे

कहता सारा जहां !

२.

सांदलबार

कभी हल चलाया

नाना ने वहाँ

फैसलाबाद कहे

अब तो सारा जहां !

३.

था कभी वहाँ

नाना का घर - बार

सांदलबार

हुआ जो बटवारा

नहीं रहा तुम्हारा !

४.

नानी की रूह

सांदल में बसती

गाँव कुँए का

पीने को मीठा पानी

रही वो तरसती !

५.

अपना रहा

ननकाना रे वहाँ

नानी की यादें

लेकर जाती मुझे

बार-बार रे जहाँ !

६.

देखा माँ तेरा

सपने में जो मैंने

सांदलबार

घर नाचें खुशियाँ

खिली हँसी बहार !

७.

दिली तम्मना

करे यूँ बेकरार

सुन माँ मेरी

सच में दिखला दे

मुझे सांदलबार !

---

 

डॉ. हरदीप कौर सन्धु (सिडनी आस्ट्रेलिया) 

विषय:

एक टिप्पणी भेजें

मत जाना, दुख होगा साम्प्रदायिकता का नंगा नाच देखकर पाकिस्तान में. और भारत में भी तो यही हो रहा है...

मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति।

इस मार्मिक कविता के लिए आपको हार्दिक बधाई हरदीप जी

बहुत ही सुन्दर, हृदय को छूने वाली कविता तांका के रूप मे पढ़ने को मिली। बधाई !

दिल को रुलाने वाली रचना. मार्मिक और सुंदर.

मन के जज़्बात तो हमेशा ही
उस मिटटी से जुड़े ही रहते हैं
जहां हमारे पुरखों की अनमोल यादें दफ़्न हैं...
अभिव्यक्ति का माध्यम
बहुत प्रभावशाली बन पडा है !!

bahut khoob likha hai.dard se bhara bhavnaon se aot prot
rachana

आप सबकी शुभकामनाओं के लिए हार्दिक रूप से आभारी हूँ ।

होंठ सिले हैं
धन्यवाद बोलता
दिल है मेरा !

आपसे मिले प्यार और सम्मान को देखकर मेरे पास शब्दों की कमी होने लगी है ....आपका धन्यवाद कैसे करूँ ?

धन्यवाद से
नहीं बना ऊपर
कोई भी शब्द !

हरदीप

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

रचनाकार में ढूंढें...

आपकी रूचि की और रचनाएँ -

randompost

कहानियाँ

[कहानी][column1]

हास्य-व्यंग्य

[व्यंग्य][column1]

लघुकथाएँ

[लघुकथा][column1]

कविताएँ

[कविता][column1]

बाल कथाएँ

[बाल कथा][column1]

उपन्यास

[उपन्यास][column1]

तकनीकी

[तकनीकी][column1][http://raviratlami.blogspot.com]

वर्ग पहेलियाँ

[आसान][column1][http://vargapaheli.blogspot.com]
[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget