शनिवार, 18 जून 2011

कैस जौनपुरी की लघुकथा मस्त चाल

कैस जौनपुरी की लघुकथा मस्त चाल

-“अरे यार...! देख जरा...क्या मस्त चाल है...!”

-“हां यार...! लेकिन कुछ ज्यादा ही मटक रही है...”

-“देख-देख...अरे वाह...ये तो मटक भी रही है...”

-“अबे अंधे...वो मटक नहीं रही है...भचक रही है...पोलियो की शिकार है...”

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कैस जौनपुरी

qaisjaunpuri@gmail.com

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(चित्र - ज्ञानेन्द्र टहनगुरिया की कलाकृति)

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