शनिवार, 4 जून 2011

अनुज नरवाल रोहतकी का संगीतबद्ध गीत - घोटाले प घोटाले रे इस देश में बोलबाला रे...

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ग़ज़ल

सता पक्ष की मंशा- कुछ भी हो पर सरकार बचनी चाहिए।

विपक्ष की मंशा- कैसे भी हो ये सरकार गिरनी चाहिए।

 

सेवक की कुर्सी पर बैठे लोग अब राजा हो गए हैं भाईयों

लोकपाल बिल लाकर लोकतंत्र की सूरत बदलनी चाहिए।

 

हमारे नेता जी देश को बेबुनियादी ब्‍यानों में उलझा रहे हैं

अब इन झूठ बोलने वालो पर बिजली गिरनी चाहिए।

 

भ्रष्‍टाचार की हदों को पार कर गए देश के चंद गद्‌दार

जनता के दरबार में इन गद्‌दारों की घंटी लगनी चाहिए।

 

अन्‍न्‍ना जी हो या बाबा रामदेव हमको मिलकर चलना होगा

कुर्बानी देनी पड़े भले ही, मां भारती की इज्‍जत बचनी चाहिए।

 

कुर्सी के लालच में देश का बेड़ा गर्क करने वालो की

‘अनुज' बाकी जिंदगी सलाखे के पीछे गुजरनी चाहिए।

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गीत-घोटाले पे घोटले रे

घोटाले पे घोटले रे

धन ये काला काला रे

करपशन का है हर तरफ

इस देश में बोलबाला रे

 

आतंकी खाएं बिरयानी

किसान यहां भूखा मरे

नेता की सेवा में बिज़ी पुलिस

कब हमारी ये सुने

झूठ देश में मजे करे है

और सच का मुंह काला रे

घोटाले पे घोटले रे

धन ये काला काला रे.........

 

टू जी हो या ओर घोटाला

जज हो चाहे प्रैसवाला

बेबस खुदको बता रहा है

इस भारत को चलाने वाला

जिसकी लाठी उसकी भैंस है

लोकतंत्र ये आला रे

घोटाले पे घोटले रे

धन ये काला काला रे......

 

कुर्सी ही सबसे बड़ी है

नेता जी को किसकी पड़ी

कमाने वाले गरीब हो रहे

हालात बड़े ही अजीब हो रहे

इनसे कौन बचाएगा

बापू नहीं आने वाला रे

घोटाले पे घोटले रे

धन ये काला काला रे............

 

पढ़ा-लिखा तबका सारा

बेरोजगारी का है मारा

रिश्‍वत और सिफारिश ने

करियर को चौपट कर डाला

सन्‍नाटा पसरा है ‘अनुज'

अब तो है कुछ होने वाला रे

घोटाले पे घोटले रे

धन ये काला काला रे.........

यह घोटाला गीत बेहद कर्णप्रिय रूप से संगीतबद्ध किया गया है जिसे आप नीचे दिए गए प्लेयर पर सीधे सुन सकते हैं -

तथा नीचे दी गई कड़ी से एमपी3 में डाउनलोड कर सकते हैं - डाउनलोड लिंक

 

 

डॉ.अनुज नरवाल रोहतकी। dr.anujnarwalrohtaki@gmail.com

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