सोमवार, 20 जून 2011

दामोदर लाल जांगिड़ की ग़ज़ल - बस है बहस में आज के अखबार की बातें...

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ग़ज़ल
खूब  करली  खुद  गरज  संसार की बातें।
आ  बैठ  करलें  चंद  लम्‍हें सार की बातें॥
 
बासी खबर बन रह गयी जिन्‍दा जली दुल्‍हन,
बस है बहस में आज के अखबार की बातें।
 
अब नफा नुकसान से आगे तो सोचें कुंद हैं,
चल  पड़े  मैयत  पे  भी व्‍यापार की बातें।
 
शोहरत पे जले वो मिले मोहताज सफा के,
मैंनें  सुनी  हैं  उनमें से दो चार की बातें।
 
फर्ज उनके भी जो हैं उनको बताइए,
करते हैं सुबहो शाम जो अधिकार की बातें।
 
          दामोदर लाल जांगिड़
         पो0लादड़िया
         नागौर राज

8 blogger-facebook:

  1. फ़र्ज़ उनके भी जो हैं उनको बताइये,
    करते हैं सुबहो-शाम जो अधिकार की बातें।
    बेहतरीन शे'र दामोदरजी को मुबारकबाद।

    उत्तर देंहटाएं
  2. बेहतरीन गजल को सम्मान , मुखर भावों का सुंदर समन्वय .....शुक्रिया

    उत्तर देंहटाएं
  3. behatarin gazal padhane ke liye dhanyavad

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच

    उत्तर देंहटाएं
  5. 'फर्ज उनके भी जो हैं उनको बताइए,
    करते हैं सुबहो शाम जो अधिकार की बातें'

    बहुत सामयिक और सुन्दर ग़ज़ल...पहली बार आपके ब्लॉग पर आया अच्छा लगा

    उत्तर देंहटाएं
  6. 'बासी खबर बन रह गयी,जिन्दा जली दुल्हन

    बस है बहस में आज के अखबार की बातें '

    .............................मर्म को स्पर्श करता शेर

    ..............................उम्दा ग़ज़ल

    उत्तर देंहटाएं
  7. जांगिड साहब, आपके ब्ल़ॉग पर पहले बार आई और आपकी खूबसूरत गजल, जो आजके माहौल पर सडीक बैठती है पठने के मिली बहुत खूब ।

    अब नफा नुकसान से आगे तो सोचें कुंद हैं,
    चल पड़े मैयत पे भी व्‍यापार की बातें।

    शोहरत पे जले वो मिले मोहताज सफा के,
    मैंनें सुनी हैं उनमें से दो चार की बातें।
    वाह ।

    उत्तर देंहटाएं

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