रविवार, 31 जुलाई 2011

ऋता शेखर ‘मधु’ के हाइगा (चित्रमय कविताएँ)

--- हाइगा का प्रेरणा स्रोत- http://hindihaiku.wordpress.com/ हाइगा ’ जापानी पेण्टिंग की एक शैली है , जिसका शाब्दिक अर्थ है- ’ चित्र-...

ऋता शेखर ‘मधु’ की बाल कविता - शिशु बेचारा

  बाल कविता शिशु बेचारा मैं बेचारा बेबस शिशु सबके हाथों की कठपुतली मैं वह करुं जो सब चाहें कोई न समझे मैं क्या चाहूँ।   दादू का मै प्...

सुरेन्द्र अग्निहोत्री की कविता

उम्‍मीदें, आकांक्षाएं, चिंताएं! आखिर ऐसा क्‍या कर दिया उन्‍होंने, हमसे हमारी स्‍वाधीनता छीन कर?   योजनाबद्ध ढंग से हमें कुसंस्‍कारित कर दिय...

हिमकर श्‍याम का आलेख - कैसे पहुंचेगा गरीबों तक निवाला ?

महज रस्‍म अदायगी बन कर न रह जाए खाद्य सुरक्षा योजना सं सद के मॉनसून सत्र में जो विधेयक पेश किये जाने हैं, उनमें खाद्य सुरक्षा विधेयक सबसे म...

प्रभुदयाल श्रीवास्तव की तीन कविताएँ

1 कुछ बात करें चुपके चुपके   अमराई में चल छुपके कुछ बात करें चुपके चुपके। चल नव किसलय को छूलेंगे डाली पर बैठे झूलेंगे एक पुष्प बनूं इच्छा...

मालिनी गौतम की कविता - काव्य कोकिला

मैं हूँ औरत, सर से पाँव तक औरत, पालने में ही घिस-घिस कर पिला दी जाती है मुझे घुट्टी मेरे औरत होने की, उसी पल से मुझे कर दिया जाता है विभक्त...

शनिवार, 30 जुलाई 2011

निसार अहमद बैंस ‘अनजान’ बीकानेरी की दो ग़ज़लें

निसार अहमद बैंस ‘अनजान’ बीकानेरी जन्म : 4मई 1953       निधन : 27जून 2011  ~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~ प्रस्तुत है , पांच हज़...

अजय 'अज्ञात' की 85 ग़ज़लें - ग़ज़ल संग्रह इज़हार

अजय ‘अज्ञात' इज़हार ग़ज़ल संग्रह   तौफीक में ख़ुदा ने बख्शा है फ़न सुख़न का उसकी ही रहमतों से अशआर कह रहा हूँ सद्भावना प्रकाशन फ़रीदाब...

प्रमोद भार्गव का आलेख - लोकपालः अब विपक्ष की बारी

आखिरकार सरकार ने जन आकांक्षाओं के विपरीत लोकपाल विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी। मसौदा सामने आने के बाद सब जान गए हैं कि यह विधेयक नख-दंत व...

अजय कुमार तिवारी की कविता - नामोनिशान

रात के गहन निविड़ में , बेचैनी के वशीभूत , अचानक , श्‍मशान की एक कब्र के पास जाकर , कुछ बुदबुदाता हूँ ,   उसे सहलाता हूँ , पास रखी ...

शुक्रवार, 29 जुलाई 2011

विवेक ओझा की कविता - कल हुई थी बारिश...

कल हुई थी बारिश, लोग कह रहे थे. इस मौसम में कैसे, दरिया बह रहे थे…   बन चुकी थी जब आदत, लोगों की, ठिठुरने की. ना जाने कैसे इतने गर्...

सुमन सारस्वत की कहानी - सौभाग्यवती

{लेखिका सुमन सारस्वत ने पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबी पारी पूरी की. मुंबई से दैनिक जनसत्ता का संस्करण बंद हुआ तो सुमन ने भी अखबारी नौकरी छ...

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