शनिवार, 30 जुलाई 2011

निसार अहमद बैंस ‘अनजान’ बीकानेरी की दो ग़ज़लें

निसार अहमद बैंस ‘अनजान’ बीकानेरी

जन्म : 4मई 1953       निधन : 27जून 2011 

~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~

प्रस्तुत है , पांच हज़ार से अधिक गज़लें लिखने वाले बीकानेर राजस्थान के गज़लकार की दो  रचनाएं.

~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~

ग़ज़ल १

जो मुहब्बत से आश्’ना होगा

दोस्तों ! वो न फ़िर फ़ना होगा

 

मिस्ल शम्मा के जो जला होगा

तीरगी से वो ही लड़ा होगा

 

कर भला तेरा भी भला होगा

किसलिए तेरा फ़िर बुरा होगा

 

हुस्न जब आपका ढला होगा

कितना हैरान आईना होगा

 

दरमयां  पर्दा-ए-हया होगा

शौक़े-दीदार फ़िर सिवा होगा

 

इश्क़ उस वक़्त कीमिया होगा

दर्दे-दिल जब भी लादवा होगा

 

रिंद है , पारसा लगा होगा

कोई अनजान से मिला होगा

 

( साभार : हादसाते-हयात )

-निसार अहमद बैंस ‘अनजान’ बीकानेरी

~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~

ग़ज़ल २

चीख  तो  चीख  है  सदा  तो नहीं

माना बहरे नहीं , सुना तो नहीं

 

जो तेरे दर पे सर को फोड़े है 

देखले तेरा आश्’ना तो नहीं

 

जब हिकायते-दर्द उसने सुनी

उसके चेहरे का रंग उड़ा  तो नहीं

 

मिस्ले-मंसूर बाद में मेरे 

दार पर दूसरा चढ़ा  तो नहीं

 

ज्यों का त्यों लौट आया ख़त मेरा 

शुक्र है उसने ये पढ़ा तो नहीं

 

सहमा कोने में कौन बैठा है

देखलो , वो कहीं ख़ुदा तो नहीं

 

बूंदा-बूंदी है आज सहरा में 

आबलों से धुआं उठा तो नहीं

 

न सही रू’नुमां निगाहों में 

नक़्श जो दिल में है मिटा तो नहीं

 

जाने क्यों मेरा नाम लेते नहीं

इतना अन्जान मैं बुरा तो नहीं

 

( साभार : हादसाते-हयात )

-निसार अहमद बैंस ‘अनजान’ बीकानेरी

~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~

प्रेषक : राजेन्द्र स्वर्णकार

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------