हरिश्चन्द्र गौड़ की लघुकथा - खुशबू

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सामान्‍य ज्ञान का पीरियड था, अध्‍यापक ने सवाल किया ‘‘सबसे अच्‍छी खुशबू किसकी है?'' बच्‍चों ने अपनी जानकारी के अनुसार यथासंभव जबाब दिये। किसी ने गुलाब के फूल की खुश्‍बू को सबसे अच्‍छा बताया, किसी ने चमेली का फूल। कोई बोला इत्र की खुशबू अच्‍छी है,किसी ने टैल्‍कम पाउडर की खुशबू को अच्‍छा बताया। सबने अपने अपने हिसाब से कई चीजों की खुशबू के तर्क दिये।

कमली एक ओर चुपचाप बैठी थी, अध्‍यापक ने उसकी ओर देखा, वह खड़ी हुई और सिर झुकाकर धीरे से बोली ‘‘सर! रोटी की..........।

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9 टिप्पणियाँ "हरिश्चन्द्र गौड़ की लघुकथा - खुशबू"

  1. ‘‘सर! रोटी की..........।
    गजब! का चिंतन. निश्चित ही शेष सुगंघ तो तभी है जब पेट भरा हो. भूख में रोटी से अच्छी सुगंध भला किसकी? यथार्थ और १०० प्रतिशत सत्य.

    अब जरा पेट बहारों का हाल सुनिए -

    परन्तु,
    इंसान का जब भी भरा होता है
    पेट और भरी होती है - दोनों जेब;
    वह जा घुसता है नामी होटलों में.
    किसी अजनवी आशियाने में....
    अजनवी लोगों के बीच पाने को ख़ुशी.

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  2. रोटी की सुगंघ? १०० प्रतिशत सत्य|

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  3. बहुत अच्छी लघु कथा ... रोती की सुगंध .. इसके बिना जीवन ही नहीं ..

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  4. बहुत अच्छी लघुकथा....
    रोटी की सुगंध........किसी भूखे के लिए इससे बढ़कर कुछ भी नहीं

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  5. अति लघु कथा और बहुत बड़ी बात-रोटी की खुश्बू -जरुरत के अनुसार ही हमें सब कुछ वैसे ही दिखता है

    शुभकामनाएं
    शुक्ल भ्रमर ५
    वह खड़ी हुई और सिर झुकाकर धीरे से बोली ‘‘सर! रोटी की..........।

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  6. लघु कथा का सही चित्रण सटीक रूप से
    बहुत सुन्दर

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  7. एक बेहतरीन लघुकथा |' खुशबू 'हरिश्चंद्र गौड़ बधाई योग्य हैं की उन्होंने कम शब्दों में एक विशाल कैनवास पर विशाल चित्र उकेर दिया है |लघुकथा 'खुशबू ' में सही अर्थों में यथार्थ की सटीक शब्दाभिव्यक्ति की है |- कमली एक ओर चुपचाप बैठी थी, अध्‍यापक ने उसकी ओर देखा, वह खड़ी हुई और सिर झुकाकर धीरे से बोली ‘‘सर! रोटी की..........।

    भाई ,हरिश्चंद्र गौड़ को एक बेहतरीन लघुकथा के सृजन के लिए हार्दिक बधाई एवं अशेष शुभकामनाएँ |-अशोक शर्मा 'भारती'

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