शुक्रवार, 15 जुलाई 2011

नवेन्दु महोदय का हास्य व्यंग्य आलेख - एक चुटकी स्ट्रेटेजी

Navendu Mahodaya (Mobile)

‘कट, कट! क्‍या चुटकी-मुटकी लगा रखा है। मोनिका, ये किसी फिल्‍म का ऑडिशन नहीं है जो तुम एक चुटकी सिन्‍दूर का डायलॉग मार के मैदान जीतना चाह रही हो। यहां पार्टी प्रचारकों का सिलेक्‍शन चल रहा है। सिलेक्‍शन में पारदर्शिता के लिये रिकॉर्डिंग की जा रही है। शूटिंग के इस हॉल को सिर्फ इसलिये चुना है कि सभी जरूरी सुविधाऐं यहां हमेशा तैयार मिलती हैं।' नेताजी, तैश में आ, कुछ ज्‍यादा ही बोल गये थे।

‘सर मुझे वाक्‍य तो पूरा करने दीजिये!' बोलकर मोनिका चुप हो गयी। हॉल में उपस्‍थित पार्टी कार्यकर्ता, जो अब तक मोनिका के रूप का रसास्‍वादन कर धन्‍य थे, अब नेताजी को घूर रहे थे।

ये मैंने क्‍या कर डाला! वैसे ही पार्टी में ग्‍लैमर की तंगी चल रही है। कहीं विरोधियों ने इसे आगे बढ़ा दिया तो मेरी वाट ही लग जायेगी। अब इसे जिज्‍जी कहूं या भैन! सोचते हुए नेताजी बोल पड़े- ‘मैं तो केवल आयोजन का उद्देश्‍य स्‍पष्‍ट कर रहा था। अपना विचार निःसंकोच व्‍यक्‍त करें मोनिका-बहन।'

संशोधित संबोधन के चलते मोनिका के चेहरे पर अब एक विजयी मुस्‍कान थी। कैमरे की ओर देख वह चहक उठी- ‘एक चुटकी सिन्‍गूर की कीमत जान चुके हैं सारे बाबू मोशाय! अब हर पार्टी का ख्‍वाब है, एक चुटकी सिन्‍गूर। अध्‍यक्ष के सिर का ताज़ है, एक चुटकी सिन्‍गूर! हर स्‍टेट यूनिट से सिन्‍गूर जैसी संभावना वाले प्रकरण आमंत्रित किये जावें। मूल्‍यांकन के बाद, तृणमूल स्‍तर पर आन्‍दोलन तैयार किये जावें और हाइकमान के निर्देशानुसार लांचिंग की जाय।' कार्यकर्ताओं की तालियों से विस्‍मित नेताजी ने जब स्‍वयं को भी ताली बजाते पाया तो झेंप कर चिल्‍ला पड़े- ‘नेक्‍स्‍ट कैंडिडेट!'

उधर नेताजी से नज़र बचाकर कुछ कार्यकर्ता हॉल से निकले। उन्‍हें अपने-अपने बॉस या खास को मोबाइल पर इस नये पैंतरे की सूचना जो देनी थी। और कुछ ही घंटों में हर पार्टी अध्‍यक्ष तक ‘एक चुटकी स्‍ट्रेटेजी' की जानकारी पंहुच गयी।

फिर कुछ महीनों और अनेक अनुरोधों के बाद नेताजी को हाईकमान के साक्षात्‍कार का सौभाग्‍य प्राप्‍त हुआ। नेताजी को सुनकर हाईकमान ने कहा- ‘वो तो दीदी का टाइमिंग ही था जो सबको भारी पड़ा। और आपको इस स्‍ट्रैटेजी के हस्‍ताक्षर पहले कभी दिखायी नहीं दिये क्‍या? जगह-जगह आदिवासी, गांववाले और कई प्रकार के समूह रेलवे ट्रैक पर या औद्योगिक प्रोजेक्‍टों, और बांधों को लेकर धरना-घेराव-आन्‍दोलन और जाने क्‍या-क्‍या नहीं कर रहे हैं। अब तक जो राज्‍य अपने अपराध नियंत्रण की तारीफ करते थकते नहीं थे वहीं से रोज़ बलात्‍कार और मर्डर की ख़बरें आ रहीं हैं। क्‍या आप जानते हैं कि जिस दिन आपने वो ‘एक चुटकी' रिकॉर्डिंग की थी, उसी दिन से हर पार्टी चुटकियां फोड़ रहीं हैं! नेताजी, एक बार फिर आप पीछे रह गये। विरोधी पार्टियों को हमारी हर बात कैसे पता चल जाती है? इस पर ध्‍यान देने की ज़रूरत है। फिर चाहे अपनों ही की जासूसी भी क्‍यों न करनी पड़े।'

पार्टी हेडक्‍वाटर्स से निकल कर मेट्रो की ओर चलते हुए नेताजी सोच रहे थे- ‘मेरे दादाजी हाईकमांड के लिये जासूसी कर आगे बढ़े थे। पापा ने, अपग्रेड के तौर पर, जासूसी के साथ भितरघात को भी शिरोधार्य किया था। मैं कुछ डिफरेंट करना चाहता हूँ, फिर हर कोशिश हेडक्‍वाटर्स से खाली हाथ लौटने पर ही क्‍यों रूक जाती है? और सड़क के किनारे लगे चाय-ठेले के रेडियो पर पुराना गाना बज रहा था- थम गया पानी, जम गयी काई; बहती नदिया ही साफ कहलाई ․ ․ ․

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लेखक - नवेन्‍दु महोदय, प्‍लाट नं़ 17, सेक्‍टर ‘बी', रविशंकर शुक्‍ल नगर, इन्‍दौर-452 008़

navendu.mahodaya@yahoo.com

लेखक परिचय- शिक्षा से इंजीनियर, पेशे से मेनेजमेंट कंसलटेंट; लेखन कार्य में गंभीर रूचि। सामान्‍य लेख पूर्व में दैनिक भास्‍कर एवं नईदुनिया आदि अखबारों में छप चुके हैं। मेनेजमेंट के सम्‍बन्‍धी लेख विषय की पत्रिकाओं में छप चुके हैं।

4 blogger-facebook:

  1. आप का बलाँग मूझे पढ कर अच्छा लगा , मैं भी एक बलाँग खोली हू
    लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/

    आपको मेरी हार्दिक शुभकामनायें.

    अगर आपको love everbody का यह प्रयास पसंद आया हो, तो कृपया फॉलोअर बन कर हमारा उत्साह अवश्य बढ़ाएँ।

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  2. Thank you for all the comments. I am still learning how to communicate in Hindi on this forum. Please forgive the use of English in response to your comments. I still prefer receiving e-mail for better communication.

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  3. garima joshi pant9:38 am

    ekaek kai vishyon ko udhera, ubharta aur un par chot karta sarla sugam vyanga. padhkar accha laga.

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