एस. के. पाण्डेय की लघुकथा - लायक

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जनी अपने पति मोहन से कह रही थी कि भगवान किसी को पुत्र दें तो लायक दें अथवा न दें। मोहन बोला “भगवान का शुक्र है कि हमारा बेटा लायक है”। रजनी आश्चर्य से मोहन को देखते हुए बोली “रामू लायक है ! जो यह भी नहीं जानता कि उसके माता-पिता भी हैं और वे अभी जिंदा हैं तथा उनके प्रति भी उसकी कुछ जिम्मेदारी है”।

मोहन बोला “अब तक मैं भी यही सोचता था कि एक बेटा हुआ भी तो नालायक निकल गया। लेकिन शर्माजी की दशा देखकर आज मुझे मालुम हुआ कि अपना रामू कितना लायक है। कम से कम उसने कभी हमारे ऊपर हाथ तो नहीं उठाया। और अपने बीबी-बच्चों का ही सही पालन-पोषण तो कर ही रहा है। नहीं तो आज ऐसे-ऐसे नालायक हैं जो माता-पिता तो क्या अपने बीबी-बच्चों के प्रति भी कोई जिम्मेदारी नहीं समझते”।

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डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर(उ. प्र.)।
URL: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

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2 टिप्पणियाँ "एस. के. पाण्डेय की लघुकथा - लायक"

  1. बिल्कुल सही कहा।

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  2. ACHCHI LAGHU KATHA HAI.DUKH KO KAM KARNE KE LIYE TULNA KARAKE SANTOSH MILATA HAI TO YAHI SAHI.
    PAVITRA AGARWAL

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