सोमवार, 4 जुलाई 2011

संजय जनागल की ग़ज़ल - ख़्वाब हकीकत न बनेगा ये मुझे मालूम है लेकिन...

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प्‍यार एक प्‍यारा सा अहसास लगता है।

सब चेहरों में तेरा नूरे नज़र दिखता है॥

 

मैं जानता हूं रूबरू ना हो पाऊंगा कभी।

पर दिल ख्‍़यालों में रोज तुझसे मिलता है॥

 

ख्‍़वाब हकीकत ना बनेगा, मुझे मालूम है।

फिर भी ये ख्‍वाब मुझे कीमती लगता है॥

 

मालूम है, हर लम्‍हा गुजरेगा अब तेरे बिन।

फिर भी क्‍यों मुझे तेरा इन्‍तजार रहता है॥

 

ज़माने ने बंद कर दिये है सारे रास्‍ते ‘संजय'।

वरना आज भी तेरा जादू मुझ पर चलता है॥

--

- संजय जनागल

मुख्‍यमंत्री कार्यालय,

सचिवालय, जयपुर

2 blogger-facebook:

  1. ख्‍़वाब हकीकत ना बनेगा, मुझे मालूम है।

    फिर भी ये ख्‍वाब मुझे कीमती लगता है॥

    bahut sundar aur sachhi pantiyaan

    उत्तर देंहटाएं
  2. मालूम है हर लम्हा गुज़रेगा अब तेरे बिन,
    फिर भी क्यूं मुझे तेरे इन्तज़ार रहता है।
    बहुत ख़ूब ्।

    उत्तर देंहटाएं

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