गुरुवार, 21 जुलाई 2011

शोभा रस्तोगी शोभा की कविता - अनुराग

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कविता
अनुराग
सुगंध में गुलाब की अनुराग की ही गंध है ,
छनक रहे अश्रु में अनुराग का ही स्पंद है ,
सांसों की धड़कन में अनुराग ही अनुराग है |


सिमट रही लहरों में अनुराग का ही सागर है ,
सुधियों के आँचल में अनुराग की ही गागर है ,
अधरों की फडकन में अनुराग ही अनुराग है |


वसंत की बयार में अनुराग का स्पर्श है ,
फैले पृथ्वीमंडल में अनुराग ही सर्वत्र है ,
अनकहे बोलों में अनुराग ही अनुराग है |


सावन की रिमझिम में अनुराग का नृत्य है ,
पनघट बजी बंसुरिया में अनुराग ही व्यक्त है ,
शोभा के गीतों में अनुराग ही अनुराग है |


------ शोभा रस्तोगी शोभा
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आत्म परिचय
नाम- शोभा रस्तोगी शोभा

शिक्षा - एम. ए. [अंग्रेजी-हिंदी ], बी. एड. , शिक्षा विशारद, संगीत प्रभाकर [ तबला ]
जन्म - 26- अक्तूबर 1968 , अलीगढ [ उ. प्र. ]
सम्प्रति - सरकारी विद्यालय दिल्ली में अध्यापिका

प्रकाशित रचनाएँ. पंजाब केसरी, राष्ट्र किंकर, हम सब साथ साथ, केपिटल रिपोर्टर,कथा संसार, बहुजन विकास, न्यू ऑब्जर्वर पोस्ट, आदि में लघुकथा, कविता, कहानी, लेख आदि प्रकाशित | ' खिडकियों पर टंगे लोग ' लघुकथा संग्रह में लघुकथाएं संकलित | ह्ससासा द्वारा अ. भा. लघुकथाकार सम्मान प्राप्त |आकाशवाणी भोपाल से लेख प्रसारित |


आन लाइन पोर्टल पर प्रकाशित --- laghukatha.com , srijangatha,com, shabdakar.com sahityashilpi, rachanakar.com तथा newobserverpost.tk में प्रकाशित लघुकथाएं व कविता |

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3 blogger-facebook:

  1. सुनदर मनभावन कविता, बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  2. SHOBHA JI --KAVITA KE BHAV AUR SHABDON KA CHUNAV SUNDER HAI.KTHAKAAR KE ROOP MEN AAPKO JANTA THA AAJ AAPKA KAVY ROOP BHI DEKHA.NISANDEH YEH ROOP BHI SWAGAT YOGAY HAI.....BDHAI...

    उत्तर देंहटाएं

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