हेमन्त देवलेकर की कविता - बाल कबीले का लोकगीत

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टिकला पोक, जोकार थोका

नाकची गोला रे

झिंगार झोका हाबली होका

टिंबल टोला रे।

जिंबल पोय झिंगला भोय

उला टुला पुला गुंबला गोय

चाकिल नाकी तातीर पाकी

रूका छुका नुका डुंगला ढोय।

झिपला झोका गिबाल पोका

माकची मोला रे....।

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साभार - चकमक अप्रैल 2010

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2 टिप्पणियाँ "हेमन्त देवलेकर की कविता - बाल कबीले का लोकगीत"

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