रविवार, 24 जुलाई 2011

हरिश्‍चन्‍द्र गौड़ की लघुकथा - जानवर

कड़ाके की सर्दी, रिमझिम होती बारिस से मौसम और भी ठंडा हो गया था। मनोहर उस निर्माणाधीन कॉलोनी से वापस लौट रहा था, जहां वह काम की तलाश में गया था

उसने सीने में अपने छह माह के बच्‍चे को चपेट रखा था । कल का हारा-थका जब वह सुबह जागा, तो टाट से बने अपने उस झोंपड़े का दृष्‍य देखकर उसका दिल दहल गया, उसकी पत्‍नी की मृत देह जो ठंड से अकड़ गयी थी, अभाव और गरीबी में उसकी लाज भी तारतार हो गयी थी। मृत देह पर उसका बच्‍चा उसके स्‍तनों को चूस चूस कर कभी भ्रम में खेल रहा था,कभी खीझकर रो रहा था। बच्‍चे की वजह से ही उसे आज काम पर नही रखा गया। किसी तरह पत्‍नी की अन्‍त्‍येष्‍टि तो कर दी पर उसे आज एक निवाला भी नसीब नहीं हुआ। बच्‍चा भी भूख से बिलबिला रहा था। पर वह तो उसे मौसम की मार से भी नहीं बचा पा रहा था । एक फटे से कपड़े में उसे ढंकने का प्रयास करता हुआ वह अंधेरे में अंदाज से चल रहा था। जब कभी बिजली चमक जाती तो वह कुछ दूर का रास्‍ता देखकर आगे बढ़ जाता।

कुछ दूर चलकर मनोहर को धुंधलके में हल्‍का सा प्रकाश दिखा, यह नवनिर्मित अति आधुनिक कॉलोनी थी। मनोहर के मन में एक आशा की किरण जागी, उसने सोचा कि कम से कम सिर झुपाने को तो जगह मिल जायेगी। वह सोच ही रहा था, तभी पानी कुछ जोर से बरस उठा, मनोहर तेजी से चलकर एक मकान के बरामदे में जा पहुंचा। पानी से सराबोर हो चुके बच्‍चे को चुप कराने की नाकाम कोशिश करने लगा। यहां उसने थोड़ी गर्मी महसूस की। राहत मिली तो बच्‍चा भी चुप हो गया।

मनोहर दीवार से सिर टिकाकर बैठ गया,बच्‍चे को और संभाल कर छाती से चिपटा लिया। उसने चारों ओर ध्‍यान से देखा, उसे वे दिन याद आ गये जब महीनों उसने पत्‍नी के साथ इस इमारत में मजदूरी की थी। पत्‍नी की याद आते ही उसकी आंखें भर आईं।

लेकिन तभी बंद दरबाजे के भीतर एक कुत्‍ता जोर जोर से भौंक उठा।

मनोहर संभल पाता, तभी भड़ाक से दरवाजा खुला, अन्‍दर से कई तरह की गंध से सराबोर एक गर्म भभका सा निकला....दरवाजे पर बेहद कम कपड़ों में एक युवती खड़ी थी। मनोहर को देखकर वह चिल्‍लाई‘‘ ये...यू जानवर! कौन है तू? क्‍या चोरी का इरादा है?..

...मनोहर कांप गया, फिर हिम्‍मत करके कहा ‘‘ मैडम मेरे पास छोटा बच्‍चा है। भूखा प्‍यासा ठंड से परेशान है फिर भी ....बेचारा मनोहर अपनी बात पूरी कर पाता तब तक तो वह जोर जोर चिल्‍लाकर बड़बड़ाने लगी उसने मनोहर पर कुत्‍ता छोड़ दिया। कुत्‍ता मनोहर पर चढ़ दौड़ा । बच्‍चा शोर सुनकर पुनः चिल्‍लाकर रो पड़ा। मनोहर को वहां से भागना पड़ा...जाते जाते उसने पलटकर देखा, वह युवती उस कुत्‍ते को गोद में उठाकर उसका मुंह चूम रही थी।

संपर्क:
gaurhc@gmail.com

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