शनिवार, 30 जुलाई 2011

अजय कुमार तिवारी की कविता - नामोनिशान

रात के गहन निविड़ में,

बेचैनी के वशीभूत,

अचानक,

श्‍मशान की एक कब्र के पास जाकर,

कुछ बुदबुदाता हूँ,

 

उसे सहलाता हूँ,

पास रखी हुई कुदाल,

उठाता हूँ,

खोदना शुरु करता हूँ,

भुरभुरी मिट्‌टी,

खुद जाती है जल्‍दी ही,

 

पर,

नहीं मिलता मेरा सशक्‍त मन,

दफन कर दिया गया था जिसे,

तानाशाहों ने बंदूक के दम पर,

निठारी के नौनिहालों की तरह,

बलात्‍कार और हत्‍या के बाद,

 

नहीं मिलती खोपड़ी, हड्‌डियाँ,

ज्‍वलंत सिद्‌धांतों की,

विचार-नसों और आतों,

के लंबे रेशे,

जो मजबूत थे तांबे के मोटे तारों से,

 

जाने गल गए कैसे,

षड्‌यंत्र है प्रशासकों का,

अवश्‍य डाला है कोई,

तेजाब से भी भयानक,

रसायन,

षड्‌यंत्र से वशीभूत होकर।

 

ताकि नामोनिशान ही मिट जाए,

सदा के लिए।

ताकि अंत हो जाए,

एक युग का,

सदा के लिए।

---

 

अजय कुमार तिवारी

बी-14, डी.ए.वी. स्‍टाफ कालोनी,

जरही, भटगाँव कालरी,

जिला - सरगुजा, छत्‍तीसगढ़

497235

5 blogger-facebook:

  1. दर्द बयाँ करती अति उत्तम रचना।
    आपकी रचना आज तेताला पर भी है ज़रा इधर भी नज़र घुमाइये
    http://tetalaa.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  2. सब अपने कुकर्म छुपा चुके हैं..

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुंदर प्रस्तुति. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

    उत्तर देंहटाएं
  4. समाज के कुरूप चेहरे का सच ब्याँ करती रचना। धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------