धर्मेन्द्र कुमार सिंह की कविता - कालजयी प्रेम

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कालजयी प्रेम

अगर हमारे जीवन में ऐसा यंत्र बना

जो मानव शरीर को परमाणुओं में बदलकर

सुदूर स्थानों पर भेज दे

तो तुम्हारी मृत्यु के पश्चात

मैं तुम्हें बाँहों में भरकर

परमाणुओं में बदल जाऊँगा

 

तुम्हारे हर परमाणु से

मेरा एक परमाणु जुड़ जाएगा

और वह यंत्र हमारे

हर परमाणु जोड़े को

ब्रह्मांड के सुदूर कोनों में भेज देगा

 

हमारा हर परमाणु जोड़ा

क्वांटम जुड़ाव के द्वारा

काल का अस्तित्व समाप्त होने तक

दूसरे जोड़ों से जुड़ा रहेगा

 

और इस तरह

हमारा प्रेम

सर्वव्यापी और कालजयी हो जाएगा


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धर्मेन्द्र कुमार सिंह
वरिष्ठ अभियन्ता (जनपद निर्माण विभाग - मुख्य बाँध)
बरमाना, बिलासपुर
हिमाचल प्रदेश
भारत

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चित्र - अमृतलाल वेगड़ का कोलाज

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3 टिप्पणियाँ "धर्मेन्द्र कुमार सिंह की कविता - कालजयी प्रेम"

  1. इस एटमी प्यार के लिए यही वैज्ञानिक शब्द बचा है की आपका प्यार H2O2 हो जाये , बधाई

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  2. बेहतरीन , इक नये अन्दाज़ मे लिखी कविता, बधाई।

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  3. कुश्वंश और दानी जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं

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